
कोरबा। गर्भधारण पूर्व और प्रसव से पहले लिंग जांच पर रोक लगाने के लिए सरकार ने पीएनडीटी एक्ट लागू किया है। साथ ही कमांड कंट्रोल सिस्टम के माध्यम से ऐसे मामलों पर निगरानी के दावे भी किए जाते हैं। इसके बावजूद कोरबा जिले में भ्रूण हत्या से लेकर जीवित या मृत नवजात शिशुओं को फेंकने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं।
सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि अब तक किसी भी मामले में पुलिस के हाथ असली दोषी तक नहीं पहुंच पाए हैं। मामला चाहे भ्रूण हत्या का हो या फिर परिपक्व अथवा अपरिपक्व शिशु के जन्म के बाद उसे त्यागने का—एक बात साफ है कि ऐसे हालात अक्सर अनैतिक संबंधों के परिणामस्वरूप बनते हैं। लोकलाज और सामाजिक डर के कारण लोग नवजात को छोडऩे या नष्ट करने जैसे अमानवीय कदम उठा लेते हैं। शहर और आसपास के उपनगरीय क्षेत्रों में कभी नहर किनारे, तो कभी कचरा डंपिंग यार्ड, झाडिय़ों या मुक्तिधाम के पास इस तरह की घटनाएं सामने आती रहती हैं। यह सोचने वाली बात है कि जहां आम लोग खड़े होने से भी कतराते हैं, वहां कोई मासूम जिंदगी को फेंक कैसे सकता है। जनजागरूकता अभियान और कानून के डर के बावजूद अब तक ऐसे मामलों में कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आए हैं। हर बार पुलिस अज्ञात आरोपियों के खिलाफ पीएनडीटी एक्ट के तहत मामला दर्ज कर जांच का आश्वासन देती है, लेकिन अब तक किसी भी आरोपी को पकडऩे में सफलता नहीं मिल सकी है।


















