नई शिक्षा नीति ने बदली दृष्टि, सच आया सामने

पिछली गलतियों से हुआ नुकसान: अजय दुबे
कोरबा। जीवन के हर क्षेत्र में शिक्षा व्यक्ति के लिए न केवल जरूरी होती है, बल्कि यह उसे समाज में सम्मान भी दिलाती है। इसलिए लोगों को चाहिए कि शिक्षा को केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम न मानें, बल्कि इसे व्यापक अर्थ में आत्मविकास का साधन समझें।
यह बात एजुकेशनिस्ट अजय दुबे ने विशेष बैच के दौरान विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही। अजय दुबे आर्यन पब्लिक स्कूल के संचालक होने के साथ-साथ सनातन संघर्ष समिति के अध्यक्ष भी हैं। लंबे समय से शिक्षा के क्षेत्र में सक्रिय रहने के कारण वे विद्यार्थियों के बीच एक प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में शिक्षा का महत्व उतना ही व्यापक था, जितना आज के आधुनिक समय में है। उस दौर की शिक्षा व्यक्ति को उसके कर्तव्यों, मूल्यों और सामाजिक दायित्वों से परिचित कराती थी। उन्होंने आगे कहा कि समय के साथ संदर्भ बदलते गए और शिक्षा की व्याख्या भी प्रभावित हुई। भारत के इतिहास को लेकर बीते दशकों में वैचारिक दृष्टिकोणों के कारण कई गलत विषयवस्तुएँ शामिल की गईं, जिससे भारत की गौरवशाली परंपरा और वास्तविक इतिहास को जानने से कई पीढिय़ाँ वंचित रह गईं।
अजय दुबे ने कहा कि नई शिक्षा नीति के लागू होने से शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं। विद्यार्थियों को अब केवल पाठ्यक्रम आधारित ज्ञान ही नहीं, बल्कि भारत की विविध सांस्कृतिक, सामाजिक और वैज्ञानिक उपलब्धियों के बारे में भी नई दृष्टि प्राप्त हो रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में शिक्षा एक ऐसी दिशा प्रदान करेगी, जिससे विद्यार्थी अपने व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास कर सकेंगे और राष्ट्र निर्माण में सार्थक योगदान देंगे।

RO No. 13467/10