चित्रोत्पला गंगा के तट पर बसा है यह शिवरीनारायण

शिवरीनारायण। शिवरीनारायण मठ महोत्सव में सप्तम दिवस के अवसर पर अनंत श्री विभूषित श्री स्वामी मधुसूदनाचार्य जी महाराज ने श्रोताओं के समक्ष महत्वपूर्ण धार्मिक और सामाजिक उपदेश दिए। उन्होंने कहा कि यह पहला तीर्थ है जहां बंदर नहीं हैं। वृंदावन के बंदर चश्मा और मोबाइल ले जाते हैं, जबकि अयोध्या के बंदर शांत और सीधे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अयोध्या में लोग बंदरों के साथ नहीं रहते, बल्कि बंदरों के साथ रहते हैं।
स्वामी जी ने नदी स्नान के समय दो वस्त्र रखने और निचोडऩे से बचने की परंपरा के महत्व पर जोर दिया। माताओं के लिए स्नान के समय तीन वस्त्र रखने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बेटा यदि अच्छा हो तो एक कुल पवित्र होता है, और यदि बेटी अच्छी हो तो दो कुल पवित्र हो जाते हैं। गुरु और कर्म की प्रधानता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि भोजन बनाते समय भगवान के चरित्र का स्मरण करने से भोजन अमृत बन जाता है। मठ में भंडारे की व्यवस्था देखकर जगन्नाथ पुरी की याद आई। स्वामी जी ने कहा कि भगवान भक्ति के बंधन में बंधते हैं और वही पकड़ में आते हैं जब स्वयं पकड़वाना चाहें।
शिवरीनारायण मठ महोत्सव में दोपहर के समय भारी भीड़ उमड़ी। समारोह में दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक तरुण प्रकाश, नीलेंद्र बहादुर सिंह, आरएसएस के छत्तीसगढ़ प्रभारी टोप लाल वर्मा, पीआईएल कारखाना प्रबंधक पारीख, पंडित दिनेश शर्मा, राघवेंद्र प्रताप सिंह, और अन्य उपस्थित रहे। मठ में आगामी 25 नवंबर को मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष पंचमी के अवसर पर सुबह श्रीमद् भागवत कथा का अनवरत आयोजन होगा। शाम को सीताराम विवाह महोत्सव बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।

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