
बीजापुर। छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में नक्सल-विरोधी अभियान के तहत शनिवार को सुरक्षाबलों को बड़ी सफलता मिली है। संयुक्त सुरक्षा बलों ने गंगालूर इलाके में चली भीषण मुठभेड़ में 12 माओवादियों को मार गिराया है। इस ऑपरेशन के बाद पूरे क्षेत्र में सर्च और कॉम्बिंग अभियान तेज कर दिया गया है। नक्सलियों की उपस्थिति की आशंका वाले इलाकों में अतिरिक्त फोर्स भी भेजी गई है। दुर्भाग्यपूर्ण रूप से इस मुठभेड़ में DRG बीजापुर के तीन बहादुर जवान—प्रधान आरक्षक मोनू वडड़ी, आरक्षक दुकारू गोंडे और आरक्षक रमेश सोड़ी शहीद हो गए। मुख्यमंत्री सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने उनके सर्वोच्च बलिदान को नमन करते हुए गहरी संवेदनाएँ व्यक्त की हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि ये जवान बस्तर में शांति और सुरक्षा की लड़ाई के सच्चे अग्रदूत थे, और उनका बलिदान कभी व्यर्थ नहीं जाएगा। घटना सुबह करीब 9 बजे शुरू हुई, जब DRG, STF, COBRA और CRPF की संयुक्त टीम बीजापुर-दंतेवाड़ा बॉर्डर के वेस्ट बस्तर डिवीजन क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन पर निकली थी। घने जंगलों में तलाशी के दौरान नक्सलियों ने टीम पर अचानक फायरिंग शुरू कर दी। सुरक्षाबलों ने तुरंत मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की, जिसके बाद घंटेभर चली मुठभेड़ में 12 नक्सलियों को ढेर कर दिया गया। मौके से सुरक्षाबलों ने 12 नक्सलियों के शव बरामद किए हैं। इसके साथ ही भारी मात्रा में हथियार भी मिले हैं।
मुख्यमंत्री ने शोक-संतप्त परिवारों के लिए संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि ईश्वर उन्हें यह असहनीय दुख सहने की शक्ति प्रदान करे तथा वीर जवानों को अपने श्रीचरणों में स्थान दे। दूसरी ओर, मुठभेड़ में घायल दो अन्य जवानों की हालत खतरे से बाहर बताई गई है। उनके उपचार के लिए समुचित चिकित्सा व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री ने दोनों घायल जवानों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की है। सरकार और सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, यह मुठभेड़ इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में नक्सलियों का दबदबा लगातार कमजोर हो रहा है और “ लाल आतंक का अंत अब निकट” है।
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि राज्य सरकार और सुरक्षाबल “माओवाद के पूर्ण खात्मे” के संकल्प पर अडिग हैं और यह अभियान और अधिक सख्ती से जारी रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जब तक बस्तर के अंतिम गाँव तक शांति, सुरक्षा और विकास का प्रकाश नहीं पहुँच जाता, तब तक नक्सल-विरोधी अभियान जारी रहेगा। सुरक्षाबलों की इस सफल कार्रवाई ने साबित कर दिया है कि माओवादी संगठनों की गतिविधियाँ लगातार कमजोर हो रही हैं और क्षेत्र में स्थायी शांति स्थापित करने की दिशा में सुरक्षा बल निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहे हैं।






















