दिल्ली-मुंबई एयरपोर्ट का हाल बेहाल, अब भी परेशान सैकड़ों यात्री

नईदिल्ली १0 दिसम्बर ।
भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो इस समय अपने इतिहास के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। रोजाना लगभग 2300 फ्लाइट्स ऑपरेट करने वाली और घरेलू एविएशन मार्केट में 60 प्रतिशत से भी अधिक हिस्सेदारी रखने वाली इस एयरलाइन का मार्केट कैप मौजूदा संकट के बाद करीब 21,000 करोड़ रुपये तक घट चुका है। ऐसे में आज इस संकट के नौवें दिन भी यात्रियों की परेशानी दूर होने का नाम नहीं ले रही है। देश के तीन बड़े एयरपोर्ट दिल्ली, अहमदाबाद और मुंबई पर इंडिगो एयरलाइंस के फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी के कारण यात्रियों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। ताजा अपडेट के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट से मिली तस्वीरों में दिखाई देता है कि बड़ी संख्या में यात्री घंटों से फंसे हुए हैं। कई उड़ानें अचानक रद्द होने या लंबे समय तक विलंब से चलने के कारण लोग एयरपोर्ट पर ही बैठकर इंतजार करने को मजबूर हैं। कुछ यात्रियों ने खाने-पीने और जानकारी न मिलने की शिकायत भी की है। दिल्ली के बाद बात अगर अहमदाबाद की करें तो अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी हालात लगभग वही हैं। इंडिगो की कई उड़ानें बाधित होने के चलते यात्रियों की लंबी कतारें नजर आ रही हैं। लोग एयरलाइन से लगातार अपडेट मांग रहे हैं, लेकिन स्पष्ट जानकारी न मिलने से असंतोष बढ़ रहा है। वहीं मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भी यात्री फ्लाइट डिसरप्शन से परेशान हैं। कई परिवार और ऑफिस यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है। कुछ यात्रियों का कहना है कि टिकट बदलने और रिफंड में भी दिक्कतें आ रही हैं।
गौरतलब है कि इंडिगो की तरफ से लगातार कैंसिलेशन और देरी की वजह से यात्रियों में नाराजगी बढ़ गई है। सोशल मीडिया पर भी लोग अपनी परेशानियां साझा कर रहे हैं। कई यात्रियों ने एयरलाइन से पारदर्शी जानकारी और बेहतर व्यवस्था की मांग की है। कुल मिलाकर, इंडिगो विवाद और उड़ानों की अनियमितता से तीनों प्रमुख एयरपोर्ट पर अराजकता जैसे हालात बने हुए हैं और यात्रियों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं।
डीजीसीए के अनुसार इंडिगो की सबसे बड़ी चूक उसके अपने संचालन प्रबंधन में ही रही। नियामक ने बताया कि एयरलाइन पायलटों की उपलब्ध संख्या का सही आकलन नहीं कर पाई, समय पर उनका प्रशिक्षण पूरा नहीं कराया और नई एफडीटीएल व्यवस्था लागू होने के बावजूद ड्यूटी रॉस्टर में आवश्यक बदलाव भी नहीं किए। यह सब तब हुआ, जबकि डीजीसीए ने एयरलाइन को कई बार पहले ही चेतावनी दी थी कि समय रहते तैयारी कर लेनी चाहिए। इन कमियों के कारण नवंबर 2025 के अंत से ही उड़ानों में बड़े पैमाने पर देरी और रद्दीकरण शुरू हो गया, जो धीरे-धीरे बढक़र एक गंभीर परिचालन संकट का रूप ले चुका है।

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