
कोरबा। किसी तरह धान की खरीदी का काम कोरबा जिले में शुरू हो गया लेकिन बहुत सारे केंद्र ऐसे हैं जहां कृषि रकबा में गैर जरूरी कटौती से किसानों के साथ-साथ समितियां परेशान है। दूसरी ओर टेक्निकल समस्याओं के चलते इन मामलों का समाधान भी नहीं हो पा रहा है।
कोरबा जिले के लेमरु स्थित उपार्जन केंद्र में 200 किसान पंजीकृत है। इनमें से 60 प्रतिशत मामलों में रकबा से जुड़ी परेशानी है। चिर्रा केंद्र में 143 किसानों ने पंजीकरण कराया है। यहां पर भी रकवा कटौती के कारण समस्या बनी हुई है। जानकारी मिली है कि 5 और 10 एकड़ की जमीन में धान की खेती करने वाले किसानों का रकबा महज डेढ़ से 3 एकड़ कर दिया गया। रिकॉर्ड में जो कुछ प्रदर्शित हो रहा है उसके हिसाब से अनाज उत्पादक अपने उत्पाद के मामले में अगली कार्यवाही नहीं कर पा रहे हैं। क्योंकि उन्होंने अधिक रकबा में उत्पादन किया है लेकिन तकनीकी व्यवस्था के अंतर्गत दूसरी चीज नजर आ रही है। जानकारी मिली है कि तकनीकी स्तर पर हुई इस गड़बड़ी के कारण कृषक समुदाय अपनी धान का विक्रय नहीं कर पा रहा है । जानकारी मिली है कि संबंधित समस्या का समाधान करने के लिए व्यवस्था जरूर दी गई है लेकिन सर्वर के प्रॉपर वर्क नहीं करने से एग्रिस्टेक पोर्टल में रकबा का सुधार नही किया जा सक रहा है। पूरे मामले को लेकर उच्च अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। याद रहे, चिर्रा केंद्र हाथियों से प्रभावित क्षेत्र है और मौजूदा समस्या को लेकर इसे संवेदनशील माना जाता है। धान खरीदी की अवधि जैसे-जैसे व्यतीत हो रही है, कृषक वर्ग की चिता बढ़ती जा रही है। जरूरत इस बात की है कि उपार्जन कदायित्व लेने वाले उच्च अधिकारी इस तरफ गंभीरता दिखाएं ताकि समस्याओं का समाधान होने के साथ उत्पादकों को सहूलियत मिल सके।



























