भूविस्थापितों ने 4 घण्टे खदान बंद एवं एसईसीएल गेवरा मुख्यालय का घेराव कर किया उग्र प्रदर्शन

कोरबा। एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, कोरबा क्षेत्र के प्रभावित गांव के भू विस्थापितों ने छत्तीसगढ़ किसान सभा और भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के नेतृत्व में अर्जन के बाद जन्म,छोटे खातेदारों को रोजगार एवं लंबित रोजगार की प्रकरणों का निराकरण कर सभी खातेदारों को रोजगार देने,आउट सोर्सिंग कार्यों में प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100′ रोजगार देने की मांग को लेकर सुबह से ही गेवरा खदान के अंदर तीन जगहों में कोल उत्पादन बंद कर दिया एवं रैली निकाल कर एसईसीएल गेवरा मुख्यालय के दोनों मुख्य द्वार को बंद कर घेराव प्रदर्शन किया। एसईसीएल द्वारा प्रभावितों की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लेने पर प्रदर्शनकारी द्वारा अनिश्चितकालीन बैठने की घोषणा कर नारेबाजी करने लगे घेराव को रोकने के लिए दो मुख्य गेट में बेरिकेटिंग की गई थी।आंदोलन से पीछे नहीं हटने पर एसईसीएल ने लिखित में बिलासपुर मुख्यालय में बैठक आयोजित कर समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया उसके बाद आंदोलन समाप्त हुआ। आंदोलन का नेतृत्व जवाहर सिंह कंवर और दीपक साहू ने किया।किसान सभा ने कहा कि मांगो पर आगे सकात्मक पहल नहीं हुआ तो 30 दिसंबर को कुसमुंडा क्षेत्र में प्रदर्शन और खदान बंद किया जायेगा। किसान सभा ने आगे के आंदोलन के लिए नोटिस पहले ही अधिकारियों को थमा दिया।किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा की सभी भू विस्थापित किसानों जिनकी जमीन एसईसीएल ने अधिग्रहण किया है उन सभी खाते पर भू विस्थापितों को स्थाई रोजगार एसईसीएल को देना होगा। विकास परियोजना के नाम पर गरीबों को सपने दिखा कर करोड़ों लोगों को विस्थापित किया गया है अपने पुनर्वास और रोजगार के लिये भू विस्थापित परिवार आज भी भटक रहे हैं। अब गुमराह करने का प्रयास एसईसीएल बंद करे नहीं तो आगे खदानों में और उग्र आंदोलन होगा।
किसान सभा के जिला सचिव दीपक साहू ने कहा कि पुराने लंबित रोजगार को लेकर एसईसीएल गंभीर नहीं है। किसानों को छोटे बड़े खातेदार के नाम पर बांटा जा रहा है किसानों की एकता में फुट डालने का काम एसईसीएल और आउट सोर्सिंग कंपनियों द्वारा किया जा रहा है छोटे खातेदारों को रोजगार से वंचित किया गया है और आउट सोर्सिंग कार्यों में भी प्रभावितों को प्राथमिकता नहीं देने का आरोप लगाया है।भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के दामोदर श्याम,रेशम यादव, सुमेंद्र सिंह ने कहा कि1978 से लेकर 2004 के मध्य कोयला खनन के लिए जमीन को अधिग्रहित किया गया है लेकिन तब से अब तक विस्थापित ग्रामीणों को न रोजगार दिया गया है न पुनर्वास ऐसे प्रभावितों की संख्या सैकड़ों में है। सभी को रोजगार देना होगाखदान बंद और घेराव में मुख्य रूप से जनपद सदस्य नेहा तंवर,दिग्विजय, पुनी राम,विजय, शरद,बग्गू सिंह,त्रिवेंद्र,सूरज,सरपंच रलिया विष्णु सिंह बिंझवार,पूर्व सरपंच बेबी सिंह तंवर,रमेश पोड़ी, संतोष राठौर भटोरा,विनोद,राजेंद्र,तुलेश,हीरा सिंह,सोनू, विवेक दास,भीम, बबिता,राजकुमारी, सुकृता, इंदु, फुल सुंदरी,दीनानाथ, नरेश, नारायण, डूमन, चंद्रशेखर के साथ बड़ी संख्या में चारों क्षेत्र के भू विस्थापित उपस्थित थे।

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