कुलदीप सेंगर की सजा निलंबन को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी सीबीआई, जल्द दायर की जाएगी याचिका

नईदिल्ली, २५ दिसम्बर ।
सीबीआई ने बुधवार को कहा कि वह पूर्व भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को उन्नाव दुष्कर्म मामले में सुनाई गई आजीवन कारावास के निलंबन और जमानत दिए जाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी।यह निर्णय 2017 के दुष्कर्म मामले में दिल्ली हाई कोर्ट के आदेशों का अध्ययन करने के बाद लिया गया है। इस बीच, लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने दुष्कर्म पीडि़ता से मुलाकात के दौरान उन्हें अपनी तरफ से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। सीबीआइ के प्रवक्ता ने कहा कि हाई कोर्ट के उस आदेश के खिलाफ जल्द-से-जल्द सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने का निर्णय लिया गया है, जिसमें सेंगर की आजीवन कारावास की सजा निलंबित करते हुए जमानत दी गई थी। हालांकि, हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सेंगर जेल में ही रहेंगे, क्योंकि वह दुष्कर्म पीडि़ता के पिता की हिरासत में मृत्यु के मामले में भी 10 साल की सजा काट रहे हैं। कुलदीप सिंह सेंगर की जमानत से आक्रोशित पीडि़ता के परिवार ने बुधवार को लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात कर न्याय और मदद की गुहार लगाई।पार्टी सूत्रों ने बताया कि पीडि़ता और उनके परिवार ने सुप्रीम कोर्ट में कुलदीप सेंगर के खिलाफ कानूनी लड़ाई लडऩे के लिए एक शीर्ष वकील दिलवाने का अनुरोध किया, जिस पर नेता विपक्ष ने सकारात्मक वादा किया।पीडि़ता की मां ने वर्तमान हालात में परिवार की सुरक्षा और जान पर खतरे की आशंका को देखते हुए किसी कांग्रेस शासित राज्य में रहने की व्यवस्था कराने की बात कही।
तीसरा आग्रह पीडि़ता के पति ने एक बेहतर नौकरी दिलाने का किया। राहुल गांधी ने इन दोनों अनुरोध पर भी मदद का भरोसा दिया।इस मुलाकात के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी मौजूद थीं। सोनिया और राहुल, दोनों ने परिवार को न्याय और सुरक्षा दिलाने के लिए अपनी तरफ से पूरा प्रयास करने की बात कही। उन्नाव पीडि़ता के परिवार को सेंगर की जमानत के खिलाफ इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन करने से रोके जाने के बाद राहुल गांधी ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया था।उन्नाव की पीडि़ता के परिवार को इंडिया गेट पर विरोध प्रदर्शन से रोकने की तीखी आलोचना करते हुए राहुल गांधी ने एक्स पर कहा, दुष्कर्मियों को जमानत और पीडि़ताओं से अपराधियों सा व्यवहार, ये कैसा न्याय है। हम सिर्फ एक मृत अर्थव्यवस्था नहीं, ऐसी अमानवीय घटनाओं के साथ मृत समाज भी बनते जा रहे हैं। लोकतंत्र में असहमति की आवाज उठाना अधिकार है और उसे दबाना अपराध। जासं के अनुसार, दुष्कर्म पीडि़ता और उनकी मां ने मंडी हाउस पहुंचकर विरोध जताने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा बल ने उन्हें बीकानेर हाउस से हिरासत में लेकर कुछ घंटे बाद छोड़ दिया। 25 वर्षीय पीडता ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री से भी मिलने के लिए समय मांगा है। पीडि़ता की मां ने रोते हुए कहा कि हाई कोर्ट का फैसला उनके लिए न्याय नहीं, बल्कि उनके बच्चों के लिए बड़ा खतरा है।

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