
श्रीनगर। जम्मू कश्मीर के राजनीतिक और सुरक्षा परिदृश्य में लगातार हो रहे सुधार के बीच अलगाववादी सियासत की दुकान पर सिर्फ ताला ही लगना शेष रह गया है। ऑल पार्टी हुर्रियत कान्फ्रेंस के उदारवादी गुट के चेयरमैन पद से मीरवाइज मौलवी उमर फारूक ने भी शुक्रवार को किनारा कर लिया। उन्होंने अपने एक्स प्रोफाइल से हुर्रयित चेयरमैन शब्द को हटा दिया है।
हालांकि उन्होंने इस पर सफाई देते हुए अंग्रेजी में कहा हाब्सन्स चायस, बढ़ते सरकारी दबाव के बीच उनके पास इसके सिवाय कोई दूसरा विकल्प नहीं था। लेकिन वह धीरे धीरे अलगाववादी राजनीति से खुद को अलग करते जाएंगे,इसका संकेत 2023में ही मिलने लगा था। इस बीच, वह अपनी तथाकथित नजरबंदी के कारण नमाज ए जुम्मा के लिए जामिया मस्जिद नहीं पहुंच पाए। अलबत्ता, प्रशासन ने उनकी नजरबंदी को लेकर काेई भी बयान जारी नहीं किया है। पुलिस व जिला प्रशासन ने उनकी नजरबंदी के बारे में चुप्पी साध रखी है।
एक्स हैंडल पर अपने प्रोफाइल से हुर्रियत चेयरमैन हटाने के बाद कट्टरपंथियों के निशाने पर आए मीरवाइज मौलवी उमर फारूक के समर्थन मेंपीडीपी के विधाायक वहीद उर रहमान परा खुलकर सामने आए हैं। उन्होंने मीरवाइज मौलवी उमर फारुक के फैसले का समर्थन करते हुए इसे हजरत मोहम्मद साहब द्वारा कुरैश कबीले के साथ की गई संधि हुदैबिया के साथ जोड़ा है।






















