बैकुंठपुर में स्ट्रीट डॉग टीकाकरण अभियान पर ब्रेक, कागजों और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर

कोरिया बैकुंठपुर। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में तथा कलेक्टर कोरिया के आदेशानुसार बैकुंठपुर में स्ट्रीट डॉग (आवारा कुत्तों) के टीकाकरण हेतु पशु चिकित्सा विभाग एवं नगर पालिका की संयुक्त टीम द्वारा अभियान शुरू किया गया था। इसका उद्देश्य शहर में रेबीज जैसी घातक बीमारी पर नियंत्रण तथा आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करना था।
हालांकि अब यह टीकाकरण अभियान गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जानकारी के अनुसार बीते लगभग एक सप्ताह से स्ट्रीट डॉग का टीकाकरण कार्य पूरी तरह बंद पड़ा है। स्थानीय नागरिकों और पशु प्रेमियों का आरोप है कि जमीनी स्तर पर टीकाकरण नहीं हो रहा, जबकि कागजी रिकॉर्ड में कार्य पूर्ण या प्रगति पर दर्शाया जा रहा है। पशु विभाग का दावा है कि बैकुंठपुर के शहरी क्षेत्र में लगभग 250 से 300 स्ट्रीट डॉग हैं, जिनके टीकाकरण की योजना बनाई गई है। वहीं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय कार्यकर्ताओं के आंकड़े इससे बिल्कुल अलग तस्वीर पेश करते हैं। उनके अनुसार बैकुंठपुर के शहरी इलाके में वर्तमान में लगभग 600 से 700 स्ट्रीट डॉग मौजूद हैं, जिससे विभागीय आंकड़ों की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। गौ रक्षक अनुराग दुबे ने कहा कि ‘एक सप्ताह से टीकाकरण कार्य पूरी तरह बंद है, अभी तक पशु विभाग नगर पालिका की संयुक्त टीम के द्वारा मात्र 15 दिन में 103 स्ट्रीक डॉगो का टीकाकरण रेडियम बेल्ट की पहचान सहित करवाया गया है दूसरी तरफ कागजों में यह दिखाया जा रहा है कि टीकाकरण हो चुका है या लगातार जारी है। यदि समय रहते अभियान को गंभीरता से नहीं चलाया गया तो आम नागरिकों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए खतरा बढ़ सकता है।’ उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि लगातार वे स्वयं और नगर पालिका की टीम टीकाकरण अभियान को दोबारा शुरू कराने के लिए प्रयासरत हैं, लेकिन पशु विभाग की ओर से वैक्सीन उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण टीकाकरण संभव नहीं हो पा रहा है। वैक्सीन की अनुपलब्धता के चलते पूरा अभियान ठप पड़ा हुआ है, जिससे प्रशासनिक तैयारियों और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की खाई उजागर हो रही है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि टीकाकरण अभियान को तत्काल प्रभाव से पुन: शुरू किया जाए, स्ट्रीट डॉग की वास्तविक संख्या का निष्पक्ष सर्वे कराया जाए तथा पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बरती जाए। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की भी मांग जोर पकड़ रही है।

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