
सडक़ पर शव रखकर मुआवजे की मांग को लेकर चक्काजाम
जांजगीर-चांपा । नए साल के दूसरे दिन जांजगीर के हदय स्थल नेताजी चौक स्थित नेताजी फर्नीचर दुकान में सीढ़ी से गिरे एक मजदूर की मौत इलाज के दौ दौरान हो गई। घटना से आक्रोशित परिजनों ने बीच सडक़ पर शव रखकर चक्काजाम कर दिया। चौक पर चारों तरफ से आवागमन बंद होते ही गाडिय़ों की लंबी कतारें लग गई। इस बीच पुलिस व प्रशासनिक अफसरों की समझाईश तथा पीडि़त परिवार को तत्कालिक तौर पर 50 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के उपरांत मामला शांत हुआ। यह चक्का जाम का लगभग 2 घंटे चली इसके बाद जांजगीर से चांपा, अकलतरा सहित अन्य मार्गो पर वाहनों की आवाजाही प्रारंभ हो सकी।
इस संबंध में सिटी कोतवाली जांजगीर से मिली जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय जांजगीर से लगे ग्राम खोखसा निवासी हरिचरण प्रधान विगत 15 सालों से नेताजी चौक स्थित फर्नीचर दुकान में काम करता था। शुक्रवार 2 जनवरी को काम के दौरान सीढ़ी से फिसलने पर उसके पैर में गंभीर चोटें आई। जिसे इलाज के लिए उसे चांपा स्थित नायक नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान शुक्रवार 2 जनवरी को शाम के समय उसकी मौत हो गई। मौत की सूचना मिलते ही परिजनों में भारी आक्रोश फैल गया। वे सडक़ पर शव रखकर बैठ गए। परिजन नेताजी फर्नीचर के संचालक को हादसे के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। प्रदर्शन के कारण नेताजी चौक पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई। इधर मामले की सूचना मिलते ही जांजगीर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को धरना प्रदर्शन नहीं करने की चेतावनी देते रहे। इस बीच परिजन लगातार मुआवजे की मांग पर अड़े रहे। साथ ही साथ जमकर नारेबाजी भी की। माहौल को तनावपूर्ण देखते हुए पर्याप्त संख्या में पुलिस बलों की तैनाती की गई थी। इस बीच दुकान संचालक के द्वारा 50 हजार रुपए की तत्काल सहायता राशि दिए जाने पर मामला शांत हुआ। इसके बाद मृतक हरिचरण के शव का पंचनामा उपरांत पोस्टमार्टम की कार्रवाई के लिए जिला अस्पताल भेजा गया। बताया जाता है की स्वर्गीय हरिचरण प्रधान के निधन पर दुकान संचालक द्वारा 10 लाख रुपए देने की बातें स्वीकार की गई है इसके बाद चक्का जाम समाप्त किया गया।शाम 5 बजे हरिचरण प्रधान के शव को रखकर उनके परिजन लगभग 3 घंटे तक चक्का जाम करते रहे। इससे शहर के लोग पूरी तरह से प्रभावित हुए किंतु जिला मुख्यालय में शहर के हृदय स्थल पर हुए इस हादसे को लेकर यहां पदस्थ कलेक्टर माहोंबे ने ना तो मामले को सुलझाने के लिए कोई पहल किया और ना ही पुलिस अधीक्षक ने व्यवस्था को ठीक करने के लिए कोई पहल की। नतीजा यह रहा कि 3 घंटे से शहर में बीच सडक़ पर मुर्दे को रखकर हंगामा होता रहा। अगर जिला प्रशासन चाहती तो मामले को चंद मिनटों में ही सुलझा लिया गया होता। अच्छा हुआ कि इस के बाद कोई बड़ी वारदात नहीं हुआ।

























