पहले एसआईआर में माथापच्ची, अब नोटिस मिलने से हलाकान हो रहे लोग

सबसे ज्यादा समस्याएं अनपढ़ और दिवंगत अभिभावकों के मामले में
कोरबा। निर्वाचन आयोग की व्यवस्था के अंतर्गत एसआईआर की प्रक्रिया में लोगों को शुरुआती दौर में जमकर माथापच्ची करनी पड़ी। यह प्रक्रिया 11 दिसंबर को अंतिम रूप से पूर्ण हुई। अब दावा आपत्ति के साथ अलग-अलग कारणों से कई केटेगरी के मतदाताओं को नोटिस थमाए जा रहे हैं, इससे उनकी परेशानियां बढ़ गई है। अनेक मामलों में शिकायतें हैं कि जब पहले मतदाता सूची को आधार मानते हुए दस्तावेज नहीं मांगे गए तो अब परेशान करने का क्या मतलब। वहीं दिवंगत हो चुके दादा-दादी और माता-पिता से संबंधित प्रमाणित दस्तावेज न होने के कारण संबंधित मतदाताओं के लिए नया सिरदर्द पैदा हो गया है। स्थिति यह है कि अब लोगों को इस नोटिस का जवाब देने के लिए नोटिस का सहारा लेना पड़ रहा है।
खबर के अनुसार निर्वाचन आयोग के अमले के द्वारा एसआईआर की प्रक्रिया के बाद ऐसे वोटरों को नोटिस जारी कर उनकी सुनवाई अलग-अलग तिथि में की जा रही है जिन्होंने वर्ष 2003 की मतदाता सूची में स्वयं अथवा अपने माता-पिता या दादा-दादी का नाम होने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया था। ऐसे वोटर सी- श्रेणी में रखे गए हैं किंतु सी वोटरों के साथ-साथ ए और बी कैटिगरी के वोटरों को भी नोटिस दिए जाने से उनकी परेशानी बढ़ गई है। वहीं बीएलओ को भी खरी-खोटी सुननी पड़ रही है।
ए वोटर ऐसे वोटर हैं जिनका नाम वर्ष 2025 की मतदाता सूची के साथ-साथ वर्ष 2003 की सूची में भी दर्ज है। बी कैटिगरी ऐसे वोटर हैं जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में तो नहीं है लेकिन उनके माता-पिता अथवा दादा-दादी का नाम जरूर दर्ज रहा है। इस तरह ए और बी कैटिगरी के वोटरों की प्रमाणिकता मात्र वर्ष 2003 की मतदाता सूची में नाम दर्ज होने से हो चुकी है जिसका विवरण स्ढ्ढक्र पत्रक में भरा गया। अब ऐसे वोटर जिनके खुद के नाम अथवा उनके माता-पिता या दादा-दादी के नाम 2003 की मतदाता सूची में दर्ज नहीं है, उन्हें वोटर लिस्ट में नाम कायम रखने हेतु अपनी प्रामाणिकता सिद्ध करने के लिए निर्वाचन आयोग के द्वारा जारी गणना पत्रक में दर्शित 11 प्रकार के दस्तावेजों में से कोई एक दस्तावेज निर्धारित जन्म वर्ष और तिथि के अनुसार प्रस्तुत करते हुए वोटर लिस्ट में अपना नाम बनाए रखने की कवायद करना है।
इसके विपरीत सी वोटरों के साथ-साथ ए और बी वोटरों को भी नोटिस जारी कर दिए जाने से यह न सिर्फ हलाकान हो रहे हैं बल्कि व्यवस्था पर भी सवाल उठा रहे हैं कि जब उन्होंने 2003 की मतदाता सूची में अपना या माता-पिता, दादा-दादी का नाम होने का प्रमाण दे दिया है तो फिर नोटिस क्यों?
वोटर का सवाल : दस्तावेज कहां से लाऊं
नोटिस मिलने के बाद सुनवाई के लिए संबंधित दफ्तर पहुंचे ए कैटेगरी के 50 वर्षीय एक वोटर ने बताया कि उनके पास ना तो खुद का कोई दस्तावेज है और ना ही माता-पिता का स्कूल सर्टिफिकेट या कुछ और। निजी जमीन संबंधी ऋण पुस्तिका है जो अस्वीकार हुआ है। आधार कार्ड, पैन कार्ड स्वीकार नहीं किया जा रहा जबकि उन्होंने एसआईआर के दौरान 2003 में अपना नाम मतदाता सूची में होने का प्रमाण दे दिया है, अब कह रहे हैं कि कोई दस्तावेज लेकर आओ, तो मैं कहां से लाऊं…? बी कैटेगरी की एक महिला मतदाता को यह कह कर लौटा दिया कि वह अपना कोई भी अंक सूची लेकर आए जबकि वह महिला पढ़ी-लिखी नहीं है, ना तो उसके माता-पिता ने जन्म प्रमाण पत्र बनवाया न ही निवास और न ही जाति प्रमाण पत्र। सरकारी जमीन का कोई पट्टा, वन अधिकार पत्र आदि नहीं है, हालांकि 2003 की मतदाता सूची में उसके माता-पिता का नाम जरूर है जो उसने एसआईआर के दौरान पत्रक भरते समय दे दिया था। सी कैटेगरी की एक युवा मतदाता ने बताया कि बचपन में ही उसके पिता का देहांत हो गया, पिता से संबंधित कोई प्रमाण पत्र उपलब्ध नहीं है। मां भी पढ़ी-लिखी नहीं है, वोटर के पास सिर्फ उसका स्कूल का सर्टिफिकेट है इसके अलावा आधार कार्ड, लेकिन यह कोई भी दस्तावेज मान्य नहीं किए जा रहे हैं।
अधिवक्ता अग्रवाल ने जताई आपत्ति
वरिष्ठ अधिवक्ता लक्ष्मी नारायण अग्रवाल ने प्राप्त नोटिस को नाजायज बताते हुए निरस्त करने जिला निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि वे 75 वर्षीय सीनियर सिटीजन हैं व 50 वर्षों से विधिक व्यवसाय (वकालत) कर रहे हैं। एस.आई.आर. के तहत निर्धारित फार्म की पूर्ति हेतु बी.एल.ओ. मुकेश कुमार पाटले, आवेदक के निवास में आकर समस्त औपचारिकताओं की पूर्ति सहित उक्त फार्म पूर्ण कराकर हस्ताक्षर लेकर गए थे। उपरोक्त के बावजूद संदर्भित नोटिस मिलने व दिनांक 14/01/2026 पर 12 से 02:30 बजे के मध्य टी.पी. नगर जोन कार्यालय कोरबा में उपस्थित होने हेतु उल्लेखित किया गया है। जिससे आवेदक को घोर मानसिक प्रताडऩा से पीडि़त होना पड़ रहा है व आवेदक के विधिक व्यवसाय (वकालत) में बाधा होना प्रकट है।
नोटिस क्यों, दिया जा रहा यह तर्क
एसआईआर की शुरुआती प्रक्रिया के बाद नोटिस देने के मामले में कहा गया कि आपके विधानसभा क्षेत्र में निर्वाचक नामावली का विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) चल रहा है। आपका विधिवत हस्ताक्षरित गणना प्रपत्र प्राप्त हो गया है। जांच के बाद, यह पाया गया है कि:
* आपने अपने या अपने रिश्तेदार से संबंधित विवरण नहीं भरा है, जो आपको या आपके रिश्तेदार को पिछले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान तैयार की गई निर्वाचक नामावली में एक पंजीकृत निर्वाचक के रूप में स्थापित कर सके।
* पिछले (एसआईआर) के दौरान तैयार की गई निर्वाचक नामावली से कोई मिलान न होने/गलत मिलान होने की संभावना को देखते हुए, आपसे अनुरोध है कि आप अपना नाम अंतिम निर्वाचक नामावली में बनाए रखने के लिए, ईसीआई द्वारा बताए गए मूल दस्तावेज़ (जो गणना प्रपत्र के पीछे की जानकारी शीट में दिए गए हैं और इस नोटिस के साथ संलग्न हैं) के साथ मेरे समक्ष उपस्थित हों।

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