सुरों की तान, दीवार फांद गए ‘मेहमान’: कन्नौज जेल में सुर-ताल और ‘निकास’

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कन्नौज। कहते हैं संगीत में वो जादू है जो दीवारों को भी पिघला देता है, लेकिन उत्तर प्रदेश की कन्नौज जिला जेल के अधीक्षक महोदय ने इसे सच कर दिखाया। रविवार की रात जब पूरा देश नए साल के स्वागत में डूबा था, हमारी जेल के ‘सुर सम्राट’ अधीक्षक भीमसेन मुकुंद जी भी तान छेड़ रहे थे। उधर साहब ने ‘सा रे गा मा’ शुरू किया, इधर दो शातिर कैदियों ने अपनी किस्मत का ‘स्वर’ ढूंढ लिया।

सुरों का ‘सिस्टम’ और कंबल का ‘विमान’

जेल के भीतर महफिल जमी थी। साहब माइक थामे गायक बने थे और सिपाही उनके गानों पर ऐसे झूम रहे थे जैसे जेल नहीं, कोई रॉक कॉन्सर्ट हो। इस सांगीतिक माहौल में सुरक्षा व्यवस्था इतनी ‘मग्न’ हो गई कि दो कैदियों ने सोचा—”जब सब मस्ती में हैं, तो हम क्यों पीछे रहें?”

उन्होंने कंबलों की रस्सी बनाई (शायद साहब के गानों की लंबी तान से प्रेरित होकर) और 22 फीट ऊंची दीवार को ऐसे फांद गए जैसे वह जेल की दीवार नहीं, पड़ोसी के घर की बाउंड्री हो। उधर गाना बजता रहा, इधर कैदी ‘रफूचक्कर’ होकर नए साल का जश्न बाहर मनाने निकल गए।

गिनती में ‘शून्य’, छुपाने में ‘सौ’ बटा ‘सौ’

जेल प्रशासन की ईमानदारी का आलम तो देखिए! रात भर कैदी गायब रहे, लेकिन साहब लोगों को लगा शायद वो भी कहीं कोने में बैठकर गाना सुन रहे होंगे। सोमवार सुबह 11 बजे जब नशा उतरा और गिनती हुई, तब पता चला कि ‘परिंदे’ उड़ चुके हैं।

इसके बाद शुरू हुआ ‘सबूत मिटाओ अभियान’। पार्टी के साक्ष्य ऐसे साफ किए गए जैसे जेल नहीं, कोई ऑपरेशन थिएटर हो। लेकिन डीएम और एसपी साहब के ‘समाधान दिवस’ छोड़कर जेल पहुंचते ही सारा ‘सुर’ बेसुरा हो गया और प्रशासन को सच उगलना पड़ा।

गाज गिरी तो टूटे ‘साज’

डीजी जेल पीसी मीणा ने इस ‘म्यूजिकल नाइट’ के आयोजकों पर सख्त एक्शन लिया है। नतीजा यह रहा:

  • जेलर और डिप्टी जेलर: सस्पेंड (अब घर पर रियाज करेंगे)।

  • हेड वार्डर और बैरक प्रभारी: सस्पेंड (ताकि अगली बार ड्यूटी पर नींद न आए)।

  • गायक अधीक्षक: विभागीय जांच के घेरे में (अब शायद ही कोई उन्हें ‘वन्स मोर’ कहे)।

फिलहाल पुलिस उन कैदियों को ढूंढ रही है, जो बिना ‘एग्जिट पास’ के जेल से ‘चेक-आउट’ कर गए। सच है, जहां कला की कद्र इतनी ज्यादा हो, वहां दीवारों का क्या काम?

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