
नईदिल्ली, १२ जनवरी ।
तीन दिन दिवसीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के समापन पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि भाषा मात्र संवाद का साधन नहीं बल्कि हमारी आत्मा और संस्कृति की संवाहक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो लोग अपनी मिट्टी और जड़ों से जुड़े होते हैं, वह अपनी भाषा में बात करने में गर्व महसूस करते हैं। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आइजीएनसीए) में आयोजित तीन दिवसीय तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिड़ला ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि आगामी बजट सत्र में उनका प्रयास रहेगा कि सभी सांसद संसद में अपनी ही भाषा में बात करें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी वैश्विक मंचों पर भारतीय भाषा में ही अपनी बात रखते हैं, जो हमारे स्वाभिमान का प्रतीक है। हमारा प्रयास है कि वैश्विक मंचों पर भारतीय भाषाओं का विस्तार हो। उन्होंने प्रवासियों से भी अपनी नई पीढ़ी को मातृभाषा से जोडऩे का आह्वान किया। वहीं, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि भारत में भाषाई विविधता कभी विभाजन का कारण नहीं बनी बल्कि यह सदैव संवाद का माध्यम रही है। हमारी भाषाएं समुदायों, आस्थाओं और ज्ञान परंपराओं के परस्पर संवाद से विकसित हुई हैं। सत्र की अध्यक्षता पद्म भूषण राम बहादुर राय ने की। इस अवसर पर शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास के ए. विनोद, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के श्याम परांडे और सम्मेलन निदेशक अनिल जोशी उपस्थित रहे।






















