
कहीं बीजों को नुकसान तो कहीं पैदावार में गिरावट
कोरबा। पौष की विदाई और माघ का महीना लगने पर भी कोरबा में सब्जियों की कीमत आसमान पर है। सामान्य तौर पर इस अवधि में लोगों को सस्ती सब्जियां उपलब्ध होती रही है। कहा जा रहा है कि मौसम और उसे संबंधित प्रभाव के चलते उत्पादन के साथ आवक प्रभावित्त हुई, इसलिए इस तरह की परिस्थितियों निर्मित हुई है। ऐसे में नहीं लगता कि अगले कुछ दिन और लोगों को ऊंची दरों से छुटकारा मिल सकेगा।
बाजार की जानकारी ने बताया कि बीते वर्षों में दिसंबर के पहले से ही खास तौर पर गोभी और टमाटर जैसी सब्जियां 30 किलो के स्तर से नीचे आती रही है। लेकिन इस वर्ष ऐसी स्थिति बिल्कुल नहीं है। यह सामग्री औसत दर से कहीं बहुत ज्यादा है। यही हाल दूसरी सब्जियों के मामले में है। ठंड के मौसम में आवक ज्यादा होने से बाजार के प्रभाव इनकी कीमतों को स्वाभाविक रूप से कम कर देते हैं और ऐसे में उपभोक्ताओं को राहत मिलती है। लेकिन इस वर्ष बारिश ज्यादा होने से लेकर शीत के प्रकोपने सब्जियों की फसल को कहीं ज्यादा नुकसान पहुंचाया। कुछ हिस्से में किसानों के द्वारा खेतों में डाले गए बीज को भी व्यापक क्षति हुई और पैदावार बाधित हो गई। ऐसे में लोकल आवक कम हुई और दूसरे क्षेत्रों से आने वाली सब्जियों का ट्रांसपोर्टेशन महंगा हो गया। कोरबा में सब्जी कारोबार से जुड़े लोग बताते हैं कि अपनी आवश्यकता और पोषण का ख्याल रखते हुए लोगों को इस मौसम में सब्जियों का उपयोग करना ही पड़ रहा है । इस मामले में कीमतों को लेकर शिकायत जरूर है लेकिन आवश्यकता की पूर्ति भी जरूरी पहलू है। सब्जियों को उद्यानिकी फसलों में शामिल किया गया है और मौसम चक्र के हिसाब से उत्पादक वर्ग को समसामयिक सलाह देने का काम उद्यानिकी का मैदानी अमला करता है, इस तरह के दावे हैं। इन सबके बावजूद मौसम पर न तो उत्पादकों का वश है और न विभाग का।



















