
निरंकुश कोयला माफिया ट्रांसफर का देते हैं अल्टीमेटम
कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले के कोयलांचल क्षेत्र अंतर्गत पटना, पंडोपारा एवं चरचा थाना क्षेत्र में विगत लगभग 20-25 वर्षों से कोयला माफिया निरंतर सक्रिय हैं। वर्षों से चले आ रहे इस अवैध कारोबार को कथित छुटभैया नेताओं एवं राजनीतिक रसूखदारों का संरक्षण मिलता रहा है, जिसके चलते ये माफिया बेखौफ होकर कानून को ठेंगा दिखाते आए हैं।
वर्तमान में प्रशासनिक सख्ती बढऩे से कोयला माफिया बौखला गए हैं। सूत्रों के अनुसार पटना थाना प्रभारी की सक्रियता और प्रभावी कार्रवाई से तिलमिलाए शराब व कोयला माफियाओं ने तीन दिन पूर्व थाना प्रभारी के स्थानांतरण का अल्टीमेटम दिया था, जिसकी समय-सीमा गुरुवार दोपहर 1 बजे समाप्त हो गई। बावजूद इसके थाना प्रभारी का तबादला नहीं होना माफियाओं के लिए सीधी चुनौती बन गया है। चरचा कालरी में पहले चरचा थाना के पीछे से छठ घाट के रास्ते मुख्य मार्ग होते हुए कोयला माफियाओं द्वारा कोयला अवैध कोयला तस्करी की जाती थी वर्तमान थाना प्रभारी द्वारा मुख्य मार्ग से कोयला परिवहन पर लगाम कसने के बाद अब चरचा क्षेत्र के कोयला माफिया शिवपुर-दुर्गापुर नगर के रास्ते पिकअप वाहनों में कोयला भरकर परिवहन कर रहे हैं। वर्तमान में देर रात प्रतिदिन लगभग दो-तीन पिकअप कोयला निकाला जा रहा है वही भोर होते ही चर्चा थाना के बगल से बाइक व साइकिल में कोयले की बोरियों को रखकर ले जाया जाता है, हैरानी की बात यह है कि इस नए नेटवर्क में भी कुछ कथित छुटभैया नेता शामिल बताए जा रहे हैं। चर्चा है कि ये तत्व एक माह के भीतर वर्तमान थाना प्रभारी का तबादला कराकर अपने पसंदीदा अधिकारी को लाने की साजिश में जुटे हैं। कोयला माफियाओं के पसंदीदा थाना प्रभारी की चर्चा बहुत जोरों पर है यदि यह थाना प्रभारी चर्चा आ जाते हैं तो इसे अप्रत्यक्ष रूप से कोयला माफिया की जीत कहा जाएगा क्योंकि इससे उनका वर्चस्व बढेगा और यह माना जाएगा कि उनका प्रभाव काफी ऊपर तक है! चरचा थाना क्षेत्र में वर्षों से पदस्थ कुछ पुलिस कर्मियों पर भी माफियाओं को संरक्षण देने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि इन कर्मियों के मोबाइल फोन की साइबर सेल से निष्पक्ष जांच कराई जाए तो पूरा सच सामने आ सकता है। यह स्थिति न केवल पुलिस की छवि को धूमिल करती है, बल्कि ईमानदार अधिकारियों के मनोबल को भी तोड़ती है यह विडंबना ही है कि राष्ट्र की ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए दिन-रात खून-पसीना बहाने वाले कोयला मजदूरों द्वारा निकाला गया कोयला असामाजिक तत्वों के हाथों में जाकर अवैध कारोबार का साधन बन रहा है। इससे न केवल सरकारी राजस्व को भारी क्षति हो रही है, बल्कि कानून-व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। स्थानीय नागरिकों ने कोरिया जिले के पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि कोयला माफियाओं, उन्हें संरक्षण देने वाले नेताओं और मिलीभगत करने वाले कर्मियों के विरुद्ध तत्काल, कठोर और पारदर्शी कार्रवाई की जाए। ऐसे तत्वों पर सख्त नकेल कसकर यह संदेश दिया जाए कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। अब देखने वाली बात यह है कि जिले के संवेदनशील और जिम्मेदार पुलिस कप्तान इस संगठित माफिया तंत्र पर किस प्रकार प्रभावी प्रहार करते हैं और ईमानदार अधिकारियों-कर्मचारियों को निर्भीक होकर कार्य करने का अवसर देते हैं। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह माफियागिरी न केवल कोयलांचल बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।


















