बौद्ध पर्यटन सर्किट से जुड़ेगा ओडिशा, रत्नागिरि-ललितगिरि-उदयगिरि-धौली स्थलों पर आधुनिक शोध के योजना की तैयारी

भुवनेश्वर। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के माध्यम से बौद्ध पर्यटन के विकास के साथ-साथ शांति और करुणा का संदेश पूरी दुनिया तक पहुंचाया जा सकता है। ओडिशा की धरती सदैव आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर रही है। रत्नागिरि, ललितगिरि, उदयगिरि, जिरांग, धौली जैसे बौद्ध धरोहर स्थलों के समग्र विकास, विरासत संरक्षण तथा इतिहास से जुड़ी आधुनिक शोध के लिए राज्य सरकार व्यापक योजनाएं तैयार कर रही है।
यह बात उपमुख्यमंत्री एवं पर्यटन मंत्री प्रभाती परिड़ा ने कही। जाजपुर जिले के बड़चणा ब्लॉक अंतर्गत उदयगिरि में आयोजित छह दिवसीय द्वितीय गुरु पद्मसम्भव प्रार्थना समारोह एवं अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन के चौथे दिन मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा की समृद्ध बौद्ध संस्कृति को जीवंत बनाए रखने के लिए सरकार ने ‘लाइट ऑफ बुद्ध फाउंडेशन’ के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। बौद्ध धर्म के विकास के लिए एक विशेषज्ञ समिति के गठन के साथ ओडिशा को भारत के बौद्ध पर्यटन सर्किट से जोडऩे पर राज्य सरकार विशेष जोर दे रही है। साथ ही जिरांग महाविहार के विकास के लिए भी कदम उठाए गए हैं। सम्मानित अतिथि एवं ओडिया भाषा, साहित्य और संस्कृति विभाग के मंत्री सूर्यवंशी सूरज ने कहा कि गुरु पद्मसम्भव का जन्म ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले में हुआ था और उन्होंने उदयगिरि में ही महापरिनिर्वाण प्राप्त किया था। गुरु पद्मसम्भव और बौद्ध तंत्रयान से संबंधित प्रमाणों तथा छिपे तथ्यों को जनसमक्ष लाने के लिए उन्होंने उपस्थित विशेषज्ञ शोधकर्ताओं की सराहना की। अन्य अतिथियों में बड़चणा विधायक अमर कुमार नायक, पर्यटन विभाग के निदेशक दीपंकर महापात्र, जिलाधिकारी अंबर कुमार कर, जिरांग के बौद्ध गुरु जिग्मे रिंगपोछे, लाइट ऑफ बुद्ध फाउंडेशन की प्रमुख वांगमो डिक्से सहित अन्य गणमान्य लोग मंचासीन थे।16 जनवरी तक चलने वाले इस अंतरराष्ट्रीय बौद्ध सम्मेलन में देश-विदेश से लगभग 1700 से अधिक बौद्ध धर्मावलंबी, गुरु और पर्यटक भाग ले रहे हैं। इस अवसर पर अतिथियों ने उदयगिरि स्मारिका तथा बौद्ध विरासत से संबंधित पुस्तकों का विमोचन किया।
साथ ही ओडिशा और गुरु पद्मसम्भव के इतिहास पर एक परिचर्चा का आयोजन भी किया गया।इस परिचर्चा में लाइट ऑफ बुद्ध फाउंडेशन के रिचर्ड डिक्से, पुरातत्वविद् डॉ. फ्रेडरिक मरुनवाल, विशिष्ट शोधकर्ता प्रबीर पटनायक, शोधकर्ता डॉ. अनीता साबत, प्रोफेसर राहुल रविराव, लामा तेंजिन साम्फेल ने भाग लिया। इसके अलावा प्रोफेसर पूर्णचंद्र मल्लिक, डॉ. सुब्रत कुमार पृष्टि, संस्कृति विभाग की उपनिदेशक देबयानी भुइयां, ओटीडीसी के जीएम धर्मेंद्र मल्लिक, अतिरिक्त जिलाधिकारी युधिष्ठिर नायक, मुख्य विकास अधिकारी देबीप्रसाद महांति, सूचना एवं जनसंपर्क अधिकारी कामिनीरंजन पटनायक तथा पर्यटन अधिकारी तापस कुमार साहू भी उपस्थित थे।

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