
संसाधन और स्टाफ में कटौती, अपग्रेड पर विचार नहीं
कोरबा। कोल इंडिया की मिनिरत्न कंपनी साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड का कोरबा स्थिति में हॉस्पिटल एक तरह से रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। कर्मचारी और उनके परिजनों को सामान्य सुविधा ही इस नाम के बड़े अस्पताल से मिल रही हैं और बाकी का दायित्व इम्पेनल हॉस्पिटल पर छोड़ दिया गया है। मौजूदा व्यवस्था में मरीज को सुविधा नहीं मिल रही हैं बल्कि इस नीति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुछ वर्ष पहले तक साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड ने कोरबा के इस अस्पताल को सेंट्रल हॉस्पिटल का नाम दिया था लेकिन अब यहां मेंन हॉस्पिटल का बोर्ड लग गया है। इसके अंतर्गत कुछ रीजनल और डिस्पेंसरी संचालित हो रही है। लेकिन कहीं भी मरीज को भर्ती करने की व्यवस्था नहीं की गई है। अधिकांश मामलों में मरीजों का परीक्षण करने के साथ सीधे स्थानीय या बाहर के अस्पताल को रेफर करना ही है। कोरबा स्थित अस्पताल में 14 विशेषज्ञ डॉक्टर की पदस्थापना की गई है इसमें सीएमओ के अलावा तीन से ज्यादा डिप्टी सीएमओ और कुछ सीएमएस भी हैं। इनके अतिरिक्त मेडिकल स्टाफ और अन्य कर्मचारी उपलब्ध कराए गए हैं खबर के अनुसार लगभग 80 की संख्या में ही कर्मचारी अब इस बड़े भारी अस्पताल में शेष रह गए हैं। जबकि बीते वर्षों में दोगुनी के लगभग थी। वर्तमान स्थिति में संसाधनों का ग्राफ कम हो गया है और स्टाफ भी। सामान्य सुविधाओं तक ही इस हॉस्पिटल को सीमित कर दिया गया है।कोरबा जिले में ही भारत अल्युमिनियम जैसी कंपनी ने अपने पुराने अस्पताल को अपग्रेड करने के साथ बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई है और कर्मचारियों के साथ-साथ गैर कर्मियों के मामले में सहूलियत देना शुरू किया है। इसके ठीक उल्टे साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड का ध्यान अपने मरीज का उपचार विभागीय अस्पताल के बजाय निजी अस्पतालों में करने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत करने की तरफ ज्यादा है। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि जब अपने मरीज को दूसरे अस्पतालों के भरोसे ही ट्रीटमेंट देना है तो फिर मेडिकल स्टाफ को कम्पनी क्यों रखे हुए हैं?
खाली पड़ें हैं वार्ड यहां
कंपनी ने अस्पताल का स्वरूप ही रेफरल सेंटर के तौर पर बना दिया है तो मरीज के यहां टिकने का सवाल ही नहीं। इसलिए कोरबा के इस बड़े अस्पताल में महिला और पुरुष वार्ड लगभग खाली पड़े हैं। विशेष मामलों के लिए केबिन की व्यवस्था की गई है और वहां भी इक्का दुक्का मरीज नजर आ रहे हैं। बताया जाता है कि ओपीडी की सुविधा मरीज को प्राप्त हो रही है और आईपीडी के मामले में सीधे रेफर करना है। कहा तो यह भी जा रहा है कि निजी अस्पतालों में रेफर करने पर भी डॉक्टर के लिए काफी अच्छी संभावना होती हैं। इसलिए यह मामला उनके लिए बहुत ही सुविधाजनक होता है।
















