सलका पंचायत की सडक़ बनी भ्रष्टाचार का प्रतीक, विभाग और ठेकेदार पर उठे गंभीर सवाल

कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिला मुख्यालय से मात्र पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम पंचायत सलका के मेको, सलवा और बस्ती को जोडऩे वाला पहुंच मार्ग आज ग्रामीणों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी और आक्रोश का कारण बन गया है। यह मार्ग क्षेत्र का एक व्यस्ततम मार्ग है, जिस पर प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीणों का आवागमन होता है। हाल ही में इस मार्ग पर सडक़ निर्माण एवं पेच रिपेयर का कार्य कराया गया, लेकिन निर्माण की गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सडक़ निर्माण कार्य को लेकर सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि आज तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह सडक़ किस विभाग के अंतर्गत आती है। लगभग चार माह पूर्व ठेकेदार द्वारा सडक़ किनारे एक सूचना पटल खड़ा किया गया था, लेकिन उस पर आज तक यह उल्लेख नहीं किया गया कि निर्माण कार्य किस विभाग द्वारा कराया जा रहा है, लागत कितनी है और ठेकेदार कौन है। नियमों के अनुसार किसी भी शासकीय निर्माण कार्य में सूचना पटल पर यह जानकारी अंकित करना अनिवार्य है, ताकि आम जनता को पारदर्शिता का भरोसा मिल सके। ग्रामीणों ने बताया कि लगभग एक सप्ताह पूर्व इस सडक़ पर पेच रिपेयर का कार्य किया गया, लेकिन मरम्मत के कुछ ही दिनों के भीतर सडक़ उखडऩे लगी है। जगह-जगह से डामर निकल रहा है, जिससे यह आशंका और गहरा गई है कि निर्माण कार्य में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है। सडक़ की वर्तमान स्थिति को देखकर ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार यह कार्य सरगुजा जिले के किसी ठेकेदार द्वारा पेटी कांट्रेक्ट में देकर कराया गया है। वहीं, सडक़ पर काम करने वाले मजदूरों ने बताया कि डामर सरगुजा जिले के राजपुर स्थित मिक्स प्लांट से तैयार कर यहां लाया गया था। जानकारों का कहना है कि सडक़ निर्माण के नियमों के अनुसार 50 किलोमीटर के दायरे के भीतर से ही सामग्री तैयार कर उपयोग की जानी चाहिए, ताकि गुणवत्ता बनी रहे और परिवहन लागत भी नियंत्रित रहे। इसके विपरीत 150 से 200 किलोमीटर दूर से सामग्री मंगाकर पेच रिपेयर करना न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि इसे भ्रष्टाचार की चरम सीमा माना जा सकता है। ग्रामीणों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से नियमों को ताक पर रखकर काम कराया गया है। यदि समय रहते इसकी जांच नहीं हुई, तो यह सडक़ आने वाले समय में पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो सकती है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ेगा।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से इस पूरे सडक़ निर्माण एवं मरम्मत कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही दोषी विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार पर कड़ी कार्रवाई करने की मांग भी उठाई जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस ‘भ्रष्टाचार की सडक़’ पर कब और क्या कार्रवाई करता है।

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