कोरबावासियों के लिए अभिशाप बन गई फ्लाई ऐश, मुश्किल होती जिंदगी

कोरबा। औद्योगिक नगर कोरबा में गर्मी की शुरुआत अभी ठीक से हुई भी नहीं है, लेकिन तेज हवाओं के चलने से राखड़ बांधों से उडऩे वाली फ्लाई ऐश ने आमजन का जीना मुश्किल कर दिया है। वातावरण में घुलती यह महीन राख न केवल प्रदूषण बढ़ा रही है, बल्कि स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर भी प्रतिकूल असर डाल रही है। समय के साथ लोगों की जिंदगी मुश्किल में पढ़ती जा रही है। लोगों को लगने लगा है कि वह अभिशापित जीवन जीने के लिए मजबूर है।
कोरबा जिले में बिजली उत्पादन से जुड़ी प्रमुख इकाइयों सीएसईबी और एनटीपीसी के बड़े क्षमता वाले फ्लाई ऐश डाइक का कुप्रबंधन इस समस्या को और गंभीर बना रहा है। लोतलोता, धनरास और गोढ़ी-पंडरीपानी क्षेत्र में स्थित ऐश डाइक लगातार पर्यावरण को नुकसान पहुँचा रहे हैं। इन स्थानों पर पर्याप्त पानी का छिडक़ाव, हरित आवरण और वैज्ञानिक प्रबंधन के अभाव में हल्की तेज हवा भी फ्लाई ऐश को उड़ाकर रिहायशी इलाकों तक पहुँचा दे रही है। तेज हवाओं के संपर्क में आकर उड़ रही फ्लाई ऐश आसपास के गांवों के साथ-साथ कोरबा शहर की आबादी तक फैल रही है। इससे लोगों को सांस लेने में दिक्कत, आंखों में जलन, त्वचा संबंधी परेशानी और एलर्जी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। सडक़ों पर दृश्यता कम होने से दुर्घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है। स्थानीय ग्रामीणों और शहरवासियों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभागों और प्रबंधन का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया, लेकिन ठोस कार्रवाई अब तक नजर नहीं आ रही है। पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते ऐश डाइक का वैज्ञानिक प्रबंधन नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और भयावह हो सकते हैं। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि फ्लाई ऐश डाइक पर नियमित जल छिडक़ाव, हरित पट्टी का विकास और उड़ान रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि औद्योगिक विकास की कीमत आमजन को अपने स्वास्थ्य से न चुकानी पड़े।

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