
कोरबा। ‘पढ़ाई हो या काम, अपना पूरा प्रयास देने के लिए मन व शरीर दोनों में सामंजस्य और एकाग्रता होना चाहिए। इसके लिए तन और मन, दोनों की प्रसन्नता जरूरी है। आर्ट ऑफ लिविंग हमें जीवन जीने की यही कला सिखाता है। ‘
उक्त कथन कमला नेहरू महाविद्यालय कोरबा में प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर के मार्गदर्शन में आयोजित आर्ट ऑफ लिविंग की कार्यशाला को संबोधित करते हुए आर्ट ऑफ लिविंग बैंगलुरु के स्वामी विभूदानंद ने कहीं। इस कार्यशाला में छात्र-छात्राओं को मार्गदर्शन प्रदान किया गया। कार्यक्रम में आर्ट ऑफ लिविंग के शिक्षक सत्यप्रकाश गुप्ता, अग्रसेन महाविद्यालय शिक्षण समिति के उपाध्यक्ष श्याम अग्रवाल, शिक्षा संकाय की विभागाध्यक्ष डॉ. भारती कुलदीप भी उपस्थित रहे। उन्होंने कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं विद्यार्थियों को अनेक महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। प्राचार्य डॉ. प्रशांत बोपापुरकर ने कहा कि शैक्षणिक या पाठ्यक्रम के अलावा महाविद्यालय में समय-समय पर इस तरह की अनेक गतिविधियों का आयोजन किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल यही है कि विद्यार्थी पढ़ाई के साथ-साथ अपने मन, मस्तिष्क और व्यक्तित्व को बेहतर स्तर पर ले जाने सहायता की जा सके।















