
आखिर किसके लिए है किसान मेला
कोरबा। खेती किसानी के कामकाज से राहत मिलने के बाद किसानों को उनके मनोरंजन के लिए कटघोरा में बरसों पहले शुरू किया गया किसान मेला अपना औचित्य खोता जा रहा है। नगर पालिका परिषद इस कार्यक्रम को करा रही है। एक पखवाड़े से भी ज्यादा समय तक चलने वाले इस आयोजन में पार्किंग स्टैंड और दुकानों के आवंटन पर सवाल खड़े हुए हैं। बार-बार चुनिंदा लोगों को ही उपकृत करने से सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इसके पीछे उद्देश्य क्या है।
26 जनवरी से इस किसान मेला की शुरुआत होना है। इसके लिए औपचारिक तैयारी की जा रही हैं। इस बीच कुछ कार्यों को गुपचुप तरीके से कर लिया गया है, इस तरह की खबरें हैं। जानकारी मिली है कि प्राइम लोकेशन की दुकानों के आवंटन के मामले में पुरानी नीति अपनाई गई है और चहेतों को इस मामले में आगे रखा गया। नगर पालिका को इस काम से न्यूनतम राशि मिलती है लेकिन इसके बाद आगे का खेल हो जाता है। दावा किया जा रहा है कि ऐसे ही लोग बाद में यहां पर खुद दुकानदारी नहीं करते बल्कि दूसरों को इस हिस्से को भेज देते हैं। वे अपनी रणनीति के जरिए 30 से 40000 की शुद्ध कमाई करते हैं। पिछले काफी समय से यही खेल चल रहा है और इस बार भी इसे दोहराया गया। सूचनाओं में कहा गया कि किसान मेला में पार्किंग स्टैंड के जरिए भी अच्छी खासी कमाई होती है। पिछले वर्ष 2 लाख 10हजार में इसका कांट्रेक्ट हुआ था। नगर पालिका ने इस बार सीधे तौर पर इस काम को नहीं किया। प्रतिस्पर्धा करने से उसे अच्छी खासी कमाई हो सकती थी लेकिन उसने टेंडर करने के बजाय किसी कांग्रेस के पार्षद को यह काम पिछले दरवाजे से दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि नगर पालिका में कई मौके पर आर्थिक चुनौतियां सामने आती हैं और इसके कारण कर्मचारियों के वेतन में दिक्कतों का सामना करना होता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए भी अपने अर्थकोष को मजबूत करने की चिंता नगर पालिका ने नहीं समझी। नगरी निकायों को भली भांति पता होता है कि अपनी आर्थिक स्थिति किस प्रकार से मजबूत की जाती है और इसके लिए क्या कुछ करना होता है। लेकिन जिस तरह से कुछ कार्यों का संपादन कर रही है उस पर सवाल तो खड़े होते ही है।
जिला प्रशासन से हुई मामले की शिकायत
सबसे खास बात यह है कि कोरबा जिले के कटघोरा में शुरू हुआ यह विवाद अब आसपास में फैल गया। नीति और नियत को लेकर लोग भी सवाल कर रहे हैं। रायपुर जिले की सामाजिक कार्यकर्ता शबा अख्तर ने इस प्रकरण को लेकर कोरबा जिले के कलेक्टर से शिकायत की। उन्होंने लिखित पत्र प्रशासन को दिया है और कहा है कि निकायों के लिए जो मामले लाभकारी हो सकते हैं उनमें टेंडर के जरिए प्रतिस्पर्धा कराई जानी चाहिए व्यक्ति को उपकृत करने के लिए आसान रास्ता बनाया जाना चाहिए।



















