महिषी की ऐतिहासिक पहचान, सहरसा में नहीं मिल रहा मंडन मिश्र-शंकराचार्य शास्त्रार्थ डाक टिकट

सहरसा, २० जनवरी ।
सहरसा स्थित महिषी का नाम मंडन मिश्र और शंकराचार्य शास्त्रार्थ देश विदेश में चर्चित है। महिषी के इस गौरवशाली इतिहास को संजोने और शास्त्रार्थ परंपरा को जीवित करने के उद्देश्य से डाक विभाग द्वारा मंडन मिश्र-शंकराचार्य शास्त्रार्थ डाक टिकट जारी किया गया। जिला का यह पहला एक ऐसा ऐतिहासिक प्रसंग है जिस पर डाक विभाग ने टिकट जारी किया। ताकि भारत सरकार के डाक विभाग के अभिलेख में भी मंडन मिश्र और शंकराचार्य शास्त्रार्थ जीवंत बना रहे। लेकिन यह डाक टिकट मंडन मिश्र की धरती पर अब तक नहीं पहुंच पाया है। मंडन मिश्र-शंकराचार्य शास्त्रार्थ पर डाक विभाग पटना में करीब तीन माह पहले बिहार राज्य स्तरीय डाक टिकट संग्रह प्रदर्शनी के माध्यम से आम लोगों के बीच प्रदर्शित किया। डाक टिकट जारी होने के बाद भी आज तक सहरसा के डाकघर में वह डाक टिकट नहीं पहुंच पाया है। इच्छुक लोग जिज्ञासापूर्वक अपने इतिहास को डाक टिकट के माध्यम से संजोकर रखने के लिए डाकघर खरीदने जाते हैं लेकिन उन्हें निराश होकर वापस लौटना पड़ता है। लोगों का कहना है कि जब सहरसा के इतिहास को डाक विभाग में जगह मिला और यहां वह डाक टिकट उपलब्ध नहीं हो पा रहा है तो अन्य जगहों का क्या कहना।
मंडन मिश्र-शंकराचार्य पर शास्त्रार्थ को लेकर डाक टिकट खरीदने पहुंचे महिषी गांव के शिक्षाविद दिलीप चौधरी ने बताया कि अब तक यह डाकघर में नहीं मिल पा रहा है।
वह दो बार डाक टिकट जारी होने के बाद उसे खरीदने पहुंचे ताकि वह अपने गांव के इतिहास को डाक टिकट के माध्यम से संग्रहित कर रख सकें। लेकिन डाकघर में नहीं मिल पा रहा है। बताया कि नए पिढ़ी के लोग इस डाक टिकट के माध्यम से उत्सुकता वस उस पहलु से अवगत हो सकेंगे।
सरकार ने अच्छी पहल की है यह डाकघर में जल्द उपलब्ध कराया जाए।महिषी में उग्रतारा मंदिर और मंडन मिश्र धाम बन रहा है। पर्यटन विभाग द्वारा इसे तैयार किया जा रहा है। करीब 14 करोड़ की लागत से मंडन मिश्र और शंकराचार्य वाले स्थल पर वह कारिडोर बनाया जा रहा है। ताकि उस इतिहास को धरोहर के रूप में संरक्षित कर रखा जा सके। यह निर्माण काम भी चल रहा है। ऐसी जानकारी पूर्व से नहीं थी। बहुत जल्द यह डाक टिकट डाकघर में उपलब्ध कराया जाएगा।

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