
कोरबा। शहर और आसपास के इलाकों में इंसानों पर बड़े और आवारा कुत्तों के हमले लगातार बढ़ रहे हैं। पिछले दो-तीन महीनों के औसत पर नजर डालें, तो हर महीने 25 से अधिक लोग इन कुत्तों के शिकार होकर घायल हो रहे हैं। शहर में कुत्तों को नियंत्रित करने वाली यूनिट की मौजूदगी नाममात्र की रह गई है, जिससे लोग भय के माहौल में जी रहे हैं।
नगर निगम क्षेत्र में कुत्तों के हमलों की घटनाएं अन्य इलाकों की तुलना में अधिक हैं। हालांकि ग्रामीण और बाहरी क्षेत्रों में भी ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, पर उनकी संख्या अपेक्षाकृत कम है। आवारा और आक्रामक कुत्तों को नियंत्रित करने का जिम्मा जिनके पास है, वे खुद ही नदारद दिखाई दे रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, कुत्ता काटने की घटनाओं में पीडि़तों को सरकारी अस्पतालों में चिकित्सा सुविधा प्रदाय की जा रही है। मेडिकल कॉलेज से लेकर सभी सीएचसी और पीएचसी में रैबिज के इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं। सामान्य तौर पर ऐसे प्रकरणों में निजी स्तर पर सेवाएं लेना लोगों को महंगा पड़ सकता है जबकि सरकार ने अपने अस्पतालों में कम्युनिटी फेसेलिटी के अंतर्गत इस चिकित्सा को नि:शुल्क किया है। बताया गया कि कुत्ते के अटैक के प्रकरणों में 3-4-7 और 28 दिन की अवधि में इंजेक्शन लेने से खतरों को टाला जा सकता है।
खतरे को ना करें नजरअंदाज
कुत्तों के द्वारा इंसान को कांटे जाने के मामले में यह बात मायने नहीं रखती की जिस स्थान पर अटैक हुआ है वहां से खून निकला या नहीं। कपड़े के ऊपर से भी अगर कुत्ते ने अटैक किया है और दांत के निशान उभरे हैं, तब भी हर हाल में बचाव के लिए रेबीज के इंजेक्शन लगवाने जरूरी हैं। भले ही सामान्य तौर पर आपको कुछ ना हो लेकिन इसका असर 6 महीने बाद दिख सकता है।
डॉ पुष्पेश कुमार, मेडिकल ऑफिसर केएमसी कोरबा



















