
नईदिल्ली २० जनवरी ।
अमेरिका एक बार फिर वैश्विक राजनीति में हलचल बढ़ाने के केंद्र में आ गया है। वेनेजुएला में हस्तक्षेप और ईरान के खिलाफ आक्रामक रुख के बाद अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर ऐसे संकेत दिए हैं, जिसने यूरोप समेत पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ट्रंप ने साफ तौर पर कहा है कि ग्रीनलैंड पर अमेरिका का अधिकार होना चाहिए। यह बयान ऐसे समय में आया है जब वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी कार्रवाइयों की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीखी चर्चा अभी थमी भी नहीं थी। ग्रीनलैंड डेनमार्क का स्वायत्तशासी क्षेत्र है और दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप भी। इसका क्षेत्रफल भारत के लगभग 70 प्रतिशत के बराबर बताया जाता है। यहां तेल, गैस और दुर्लभ खनिजों के बड़े भंडार होने की संभावना है। जलवायु परिवर्तन के कारण बर्फ तेजी से पिघल रही है, जिससे इन संसाधनों के दोहन की संभावनाएं बढ़ गई हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यही कारण है कि ग्रीनलैंड अब महाशक्तियों के लिए रणनीतिक लक्ष्य बनता जा रहा है।
ट्रंप का तर्क है कि ग्रीनलैंड पर रूस और चीन की नजर है, इसलिए अमेरिका को पहले से कदम उठाना चाहिए। इसी बीच खबर है कि नाटो में शामिल कुछ यूरोपीय देशों ने अपने सैनिकों को ग्रीनलैंड भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। डेनमार्क के नेताओं ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वे किसी भी कीमत पर ग्रीनलैंड को अमेरिका का हिस्सा नहीं बनने देंगे। हालांकि ट्रंप ने डेनमार्क की ऐतिहासिक दावेदारी पर तंज कसते हुए कहा कि सिर्फ पांच सौ साल पहले किसी नौका के वहां पहुंचने से वह क्षेत्र किसी का नहीं हो जाता।



















