
मुंबई, २१ जनवरी ।
महाराष्ट्र सरकार ने 1993 मुंबई सिलसिलेवार बम धमाकों के दोषी अबू सलेम को पैरोल दिए जाने का कड़ा विरोध करते हुए बाम्बे हाइकोर्ट को बताया कि उसकी रिहाई से उसके फिर फरार होने की आशंका है, जिससे भारत-पुर्तगाल संबंधों पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। न्यायमूर्ति एएस गडकरी और श्याम चंदक की पीठ के समक्ष दायर हलफनामे में सरकार ने सलेम को एक अंतरराष्ट्रीय गैंगस्टर बताते हुए कहा कि अधिकतम दो दिन की आपातकालीन पैरोल पर ही विचार किया जा सकता है। जेल महानिरीक्षक सुहास वारके ने कहा कि सलेम 1993 की तरह दोबारा फरार हो सकता है, जो समाज की सुरक्षा और दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिए गंभीर खतरा होगा। सरकार ने बताया कि सलेम को 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण संधि के तहत भारत लाया गया था और उस समय दिए गए आश्वासनों का पालन करना भारत की जिम्मेदारी है। यदि वह फरार हुआ, तो गंभीर कूटनीतिक संकट पैदा हो सकता है।सीबीआइ ने भी किया विरोध सीबीआई ने भी पैरोल का विरोध करते हुए कानून-व्यवस्था की आशंका जताई, हालांकि अदालत ने एजेंसी से इस पर स्पष्ट विवरण मांगा है। सलेम ने नवंबर 2025 में अपने बड़े भाई अबू हकीम अंसारी के निधन के बाद 14 दिन की पैरोल मांगी थी। उत्तर प्रदेश पुलिस की रिपोर्ट में आजमगढ़ के सरायमीर क्षेत्र को सांप्रदायिक रूप से संवेदनशील बताते हुए उसकी मौजूदगी से शांति भंग होने की आशंका जताई गई, जिसके बाद जेल अधिकारियों ने उसकी अर्जी खारिज कर दी।अबू सलेम को 1993 मुंबई बम धमाकों सहित तीन मामलों में आजीवन कारावास और कई अन्य मामलों में 25 वर्ष की सजा सुनाई जा चुकी है। हाइकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 28 जनवरी तय की है।























