कलेक्टर कार्यालय घेराव की अनुमति पर उठे सवाल

कोरिया बैकुंठपुर। मनेन्द्रगढ़ जिले में कलेक्टर कार्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन और घेराव की घटना को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामने आई तस्वीरों और वीडियो में बड़ी संख्या में कांग्रेसी कलेक्टर कार्यालय के मुख्य गेट पर एकत्र दिखाई दे रहे हैं। कुछ प्रदर्शनकारी गेट पर चढ़ते हुए भी नजर आ रहे हैं, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर चिंता उत्पन्न हो गई है।
ज्ञात हो कि कलेक्टर कार्यालय जिले का सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक केंद्र होता है, जहां 24 घंटे आदर्श आचार संहिता एवं सुरक्षा नियम लागू रहते हैं। ऐसे में कलेक्टर कार्यालय का घेराव करना सामान्यत: प्रतिबंधित माना जाता है। इसके बावजूद इस प्रकार के आयोजन की अनुमति कैसे दी गई, यह अब जिले में चर्चा का विषय बन गया है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल थे, जिनमें विभिन्न संगठनों और समूहों के सदस्य बताए जा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों द्वारा नारेबाजी की गई और अपनी मांगों को लेकर प्रशासन पर दबाव बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि मौके पर पुलिस बल की तैनाती रही, लेकिन गेट पर चढऩे जैसी घटनाओं ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि आम जनता को कलेक्टर कार्यालय जैसे संवेदनशील परिसर में इस तरह प्रदर्शन की खुली छूट दी जाएगी, तो भविष्य में इससे अराजकता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। लोगों ने सवाल उठाया है कि आखिर किस अधिकारी या सक्षम प्राधिकारी ने कलेक्टर कार्यालय घेराव की अनुमति दी। इस पूरे मामले को लेकर अब प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। आमजन की मांग है कि घटना की निष्पक्ष जांच हो और यह स्पष्ट किया जाए कि नियमों के विरुद्ध अनुमति देने के लिए कौन जिम्मेदार है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए कड़े दिशा-निर्देश और सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। फिलहाल प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन मामला जिलेभर में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।

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