जिंदगी पर बोझ बनता जा रहा डामर प्लांट से उठने वाला धुआं, पर्यावरण पर भी असर

कोरबा। उद्योगों को बढ़ावा देने के साथ इनके मामले में पर्यावरण मानकों को जरूरी किया गया है और हर हाल में इसे नियंत्रण में रखा भी जाना है। इसके बावजूद कटघोरा में तारकोल (डामर) प्लांट से उठ रहे धुएं ने आसपास के वातावरण को बाधित करना जारी रखा है। जन स्वास्थ्य के अलावा कृषि संपदा पर भी इसका साफ असर पड़ रहा है। बार-बार ध्यानाकर्षण के बावजूद किसी प्रकार के नतीजे नहीं आने से लोग परेशान हैं।
बताया गया कि कटघोरा में डामर फैक्ट्री से उठने वाला धुआँ सीधे बॉयज हॉस्टल और गल्र्स हॉस्टल तक पहुँच रहा है। इसके कारण छात्रों को साँस लेने में परेशानी, आँखों में जलन, खाँसी, सिरदर्द जैसी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। प्रदूषित वातावरण के चलते छात्र न तो खुले में बैठ पा रहे हैं और न ही छात्रावासों में आराम से अध्ययन कर पा रहे हैं। लगातार फैलते प्रदूषण से कॉलेज का शैक्षणिक माहौल भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। छात्रों का कहना है कि यह मामला केवल वर्तमान परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके भविष्य के लिए भी एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। विद्यार्थियों को भी उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस गंभीर समस्या का समाधान करेगा और उन्हें स्वच्छ एवं सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा। इस अवसर पर एबीवीपी कार्यकर्ता अमरजीत सिंह राजपूत (प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य/कैंपस अध्यक्ष), प्रदीप साहू (जिला संगठन मंत्री), सुमित साहू (नगर स्टडी सर्कल प्रमुख), शुभम सूर्यवंशी, अखिल खूंटे, प्रीति साव, अजय कश्यप, देवेंद्र साहू, झरना साहू, संजना मरावी, जान्हवी दिनकर, रंजना लिबर्टी, जितेश साहू एवं मंदीप सिंह मार्को सहित कई कार्यकर्ता एवं छात्र-छात्राएँ प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।
परीक्षा नजदीक कैसे करें पढ़ाई
विद्यार्थियों ने बताया कि 20 जनवरी से प्रैक्टिकल परीक्षाएँ प्रारंभ होने वाली हैं, लेकिन वर्तमान हालात में पढ़ाई करना अत्यंत कठिन हो गया है। प्रदूषण के कारण न केवल उनकी तैयारी प्रभावित हो रही है, बल्कि यह समस्या लंबे समय तक बनी रही तो छात्रों के स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकता है।
अभाविप ने प्रशासन को दी चेतावनी
इस गंभीर समस्या को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) जिला कोरबा इकाई, कटघोरा द्वारा अनुविभागीय अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन के माध्यम से एबीवीपी ने डामर फैक्ट्री की तत्काल जाँच कराने, प्रदूषण नियंत्रण के नियमों के पालन की समीक्षा करने तथा आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि कृषि महाविद्यालय परिसर और छात्रावासों को प्रदूषण से मुक्त कराया जा सके। एबीवीपी ने प्रशासन से शीघ्र संज्ञान लेकर ठोस कदम उठाने की अपील की है। परिषद का कहना है कि छात्रों के स्वास्थ्य और शिक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाना चाहिए।

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