
करही बाजार। नए साल की पहली गुप्त नवरात्रि 19 जनवरी से शुरू हो गई है। सोमवार को कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 8.34 से 9.59 बजे रहा। वहीं अभिजीत मुहूर्त दोषहर 12.13 से 12.58 बजे तक रहा। माघ मास में नौ दिनों तक मनाई जाने वाली गुप्त नवरात्रि का आरंभ सर्वार्थ सिद्धि योग के महासंयोग में हुआ। नवरात्रि का समापन 27 जनवरी को होगा। इस दौरान साधक तंत्र, मंत्र और यंत्र की सिद्धि के लिए गुप्त साधना करेंगे। वर्ष में कुल चार नवरात्रि मनाई जाती है। जिनमें दो प्रकट और दो गुप्त नवरात्रि होती है। माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त।
जबकि चैत्र और अश्विन मास की नवरात्रि प्रकट नवरात्रि कहलाती है। माघ मासस की गुप्त नवरात्रि शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक रहती है। जिसमें कई विशेष पर्व भी आते हैं। इनमें गौरी तृतीया, वरद तिल कुंद चतुर्थी, बसंत पंचमी, नर्मदा जयंती,आरोग्य सप्तमी और भीष्म अष्टमी प्रमुख है। गुप्त नवरात्र को लेकर करही बाजार सहित क्षेत्र भर के देवी मंदिरों में भी विशेष पूजा पाठ और आराधना प्रारंभ हो गया है। इसके लिए मंदिर में तैयारियों पूरी हो गई है। पंडित मेवा प्रसाद तिवारी ने कहा कि उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि में चंद्रमा की उपस्थिति में गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ हुआ है।
मध्यमान काल में अभिजीत मुहूर्त के दौरान सर्वार्थ सिद्धि योग का विशेष संयोग रहेगा। इस योग को सभी शुभ और मांगलिक कार्यों को सफल बनाने वाला माना जाता है। मान्यता है कि इस योग में की गई साधना और आराधना शीघ्र फलदायी होती हैं। प्रकट नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। जबकि गुप्त नवरात्रि में दस महा विद्याओं की विशेष पूजा होती है। प्रगट नवरात्रि सांसारिक सुखों और इच्छाओं की पूर्ति के लिए मानी जाती है। वहीं गुप्ता नवरात्रि मनोकामना सिद्धि और मोक्ष प्राप्ति के लिए की जाती है। प्रकट नवरात्रि वैष्णव परंपरा से और नवरात्रि शेव व शक्ति परंपरा से जुड़ी मानी जाती है। प्रकट नवरात्रि की देवी मां पार्वती और गुप्त नवरात्रि की अधिष्ठात्री देवी मां काली मानी जाती है। गुप्त नवरात्रि का समापन दसवें दिन नवमी तिथि को होता है।

















