डीएम के गनमैन ने की मारपीट, दीपका के नायब तहसीलदार भगत अनशन पर

आनाकानी करते रहे थाना प्रभारी एफआईआर दर्ज करने में
कोरबा। सिस्टम में सुधार को लेकर लगातार बात की जा रही है लेकिन हो कुछ नहीं रहा है। आलम यह है कि वर्दी की आड़ में कोई भी किसी को भी प्रताडि़त करने से पीछे नहीं है। कोरबा जिले से दीपका के नायाब तहसीलदार बंदेराम भगत को इसी चक्कर में पुलिस थाना के सामने अनशन करना पड़ा। आरोप है कि कलेक्टर के गनमैन ने भगत के पुत्र से जमकर मारपीट की, जिसमें वह जख्मी हो गया।
नायाब तहसीलदार बंदेराम भगत को सुशासन के दौर में कलेक्टर के गनमैन के खिलाफ न्याय की मांग करने के लिए इस तरह का कदम उठाने को मजबूर होना पड़ा।आरोप है कि सारंगढ़-बिलाईगढ़ कलेक्टर के गनमैन हरिशचंद्र गुमान ने भारत माता चौक पर नायब तहसीलदार के पुत्र राहुल भगत के साथ गाली-गलौज करते हुए बेरहमी से मारपीट की। मारपीट इतनी गंभीर थी कि राहुल के कान का पर्दा फट गया। घटना की लिखित शिकायत पुलिस को दी गई, लेकिन 48 घंटे तक एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
नायब तहसीलदार भगत ने तरूण छत्तीसगढ़ को बताया कि वे गुरुवार दोपहर से थाने में मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने थाना प्रभारी को 8-10 बार फोन किया, लेकिन फोन नहीं उठाया गया। जब संपर्क हुआ भी तो केवल टालमटोल भरे जवाब दिए गए। न जांच अधिकारी और न ही अन्य पुलिसकर्मी कोई स्पष्ट स्थिति बताने में सक्षम रहे।
पुलिस की कार्यप्रणाली से आहत होकर नायब तहसीलदार ने साफ कह दिया कि जब तक एफआईआर की प्रति नहीं मिलेगी, वे अन्न और जल ग्रहण नहीं करेंगे। एक जिम्मेदार राजपत्रित अधिकारी का इस तरह थाने के सामने बैठने से सुशासन की पोल खुल गई।
अनशन की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अमले में हडक़ंप मच गया। वरिष्ठ अधिकारियों को मामले की जानकारी दी गई। सवाल अब भी कायम है कि जब एक तहसीलदार के बेटे को न्याय के लिए अनशन करना पड़े, तो आम नागरिक की सुनवाई कितनी सहज होगी?

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