गोरखपुर में कॉल सेंटर की आड़ में अमेरिकी नागरिकों के साथ हो रहा था खेल, 6 पकड़े गए

गोरखपुर, २४ जनवरी ।
स्वास्थ्य बीमा, टैक्स रिफंड और सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का झांसा देकर अमेरिकी नागरिकों से जालसाजी करने वाले संगठित गिरोह का चिलुआताल थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। ग्लोब सोल्यूशन के नाम पर चल रहा काल सेंटर छह माह से सक्रिय था।छापेमारी के दौरान कोलकाता, सिलीगुड़ी, लखनऊ, बलरामपुर और गोरखपुर के रहने वाले पांच युवकों और एक युवती को गिरफ्तार किया गया है। उनके कब्जे से 28 लैपटॉप, 37 हेडफोन, दो राउटर, कई मोबाइल फोन, कालिंग स्क्रिप्ट, ई-मेल डाटा और दस्तावेज बरामद हुए हैं। काल सेंटर पर 10 युवक व पांच युवतियां बतौर एजेंट काम करते थे जिन्हें पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया। सिलीगुड़ी में रह रहे मास्टरमाइंड समेत चार अन्य की तलाश चल रही है।अमेरिका में रहने वाला गिरोह का सदस्य प्रतिदिन एक हजार विदेशी नागरिकों का डाटा मुहैया करता था जिसके बारे में जानकारी जुटाई जा रही है।पुलिस अधीक्षक उत्तरी, ज्ञानेंद्र कुमार ने शुक्रवार को प्रेस वार्ता में बताया कि रैकेट का संचालन करीमनगर स्थित तीन मंजिला मकान से किया जा रहा था जिसे 40 हजार रुपये प्रतिमाह किराए पर लिया गया था।शाम सात बजे से भोर में चार बजे तक एप आधारित कालिंग सिस्टम से अमेरिकी नागरिकों को फोन किया जाता था।काल करने वाले जार्ज, लेविस, जॉन जैसे फर्जी नाम बताकर स्वास्थ्य बीमा, टैक्स रिफंड या यूएस सरकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिलाते थे। रोजाना तकरीबन एक हजार काल की जाती थी।जैसे ही कोई विदेशी नागरिक बातों में फंसता, काल को सेंटर संचालक के पास फारवर्ड कर दिया जाता था। यहां बैंकिंग प्रक्रिया के नाम पर बड़ी रकम ऐंठ ली जाती थी। ठगी से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा कमीशन के रूप में स्थानीय गिरोह तक पहुंचाया जाता था।गिरफ्तार आरोपितों की पहचान बंगाल के एम हुगली स्थित उत्तरा पारा के 87 गवर्नमेंट कालोनी नंबर एक माखला के रहने वाले रूपेश सिंह, कोलकाता के पोस्ता स्थित नबाबगंज लेन में रहने वाले अभिषेक पांडेय, तिवारीपुर के सूरजकुंड निवासी हर्ष आर्या, बलरामपुर जिले के कोतवाली देहात स्थित शेखरपुर में रहने वाले सूरज कुमार तिवारी, शंकरपुर के अश्वनी कुमार मौर्या और लखनऊ के लेखराज स्थित इंद्रानगर पीरबाग कालोनी में रहने वाली सलोनी यादव के रूप में हुई।काल सेंटर में काम करने वाले युवक व युवतियों ने बताया कि उन्हें ठगी की जानकारी नहीं थी। अभिषेक ने इंटरव्यू लेकर नौकरी दी थी, उन्हें 10 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह मिलते थे। एसपी ने बताया कि गिरोह का रुपेश सिंह को एसटीएफ ने 16 फरवरी 2025 को लखनऊ में फर्जी काल सेंटर चलाने के आरोप में पकड़ा था। इस मामले में अभिषेक व रौनक की तलाश चल रही थी। मास्टरमाइंड रौनक कुमार कोलकाता के एमजी रोड पर रहता है, जिसने सिलीगुड़ी में कार्यालय खोला है। ठगी के रुपये का लेनदेन वहीं किया जाता है।बंगाल के 24 उत्तर परगना में काली पार्क के रहने वाले गौवर पाठक, कोलकाता के एमजी रोड निवासी कृष्णा और विनित अग्रवाल, जिनका पता तस्दीक नहीं हो पाया है, फरार चल रहे हैं। गिरोह के पास ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूके और यूएसए के लगभग 1.80 लाख विदेशी नागरिकों का संवेदनशील डाटा मौजूद था। नाम, फोन नंबर, ईमेल आईडी और बैंकिंग जानकारी के आधार पर यह गिरोह ठगी की योजना बनाता था।

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