इंजीनियर मौत केस: नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अधूरे प्रोजेक्ट्स बने मौत के कुएं, जलभराव से दलदल में बदले बेसमेंट

नोएडा। अधूरी परियोजनाओं के गहरे बेसमेंट अब मौत के कुओं में तब्दील हो चुके हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में अधूरी परियोजनाओं समेत 50 से अधिक सोसायटियों व भूखंड में वर्षों से खोदे गए गड्ढों में पानी जमा है। यहां घरों और सोसायटी से निकलने वाला पानी बेसमेंट और खोदे गए भूखंड में भर जाता है।सेक्टर-150 में बने ऐसे ही मौत के दलदल में सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत हो चुकी है। आधी अधूरी बनी सोसायटियों में लोग रह रहे हैं। यहां बेसमेंट में पानी भरता है। इमारत कमजोर हो रही है और लोगों को खतरा बढ़ रहा है।ग्रेटर नोएडा वेस्ट में नॉलेज पार्क पांच में पोदार स्कूल के समीप अवैध खनन के बाद सडक़ के किनारे बना दलदल नूमा तालाब। जागरण
गौतमबुद्ध नगर जिले में विकास की रफ्तार के नाम पर लापरवाही की इबारत लिखी जा रही है। जिले में 50 से अधिक अधूरी आवासीय परियोजनाओं और व्यावसायिक भूखंड के बेसमेंट में गहरा पानी जमा है। इनमें से कई जगहों पर निर्माण कार्य वर्षों पहले रुक गया, लेकिन बेसमेंट खोदने के बाद कोई जल निकासी व्यवस्था नहीं की गई। ग्रेटर सेक्टर-150, 151, 82 समेत ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ऐसी 50 से अधिक परियोजनाएं हैं।यहां बेसमेंट के लिए खोदे गए गड्ढे या तैयार किए गए बेसमेंट जलाशय बन गए हैं। ग्रेटर नोएडा वेस्ट की रेडिकान वेदांतम सोसायटी में 550 से अधिक परिवार रहते हैं। यहां बेसमेंट में पांच से छह फीट तक पानी भरा है। वर्षा के दौरान बेसमेट पार्किंग कई सोसायटियों में तालाब में बदल जाती है, जहां दर्जनों कारें और बाइकें डूब जाती हैं। लंबे समय तक पानी रिसने से पिलर, बीम और फाउंडेशन कमजोर हो रहे हैं। सोसायटियों में लिफ्ट पानी भरने से बार-बार खराब हो रहीं हैं। आम्रपाली की परियोजनाओं में जलभराव की समस्या बनी हुई है। यह स्थिति राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के दिशा-निर्देशों का स्पष्ट उल्लंघन है, जहां निर्माण स्थलों पर जलभराव रोकने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के सख्त नियम हैं। इसके बावजूद प्राधिकरण की ओर से बिल्डरों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही। कई मामलों में भूखंड आवंटन के बाद निर्माण रुकने पर भी गड्ढों को भरने या ढकने का प्रयास नहीं किया गया।

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