
वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय के छात्र नेता बलिया निवासी डा. मृत्युंजय तिवारी ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा अधिसूचित नए विनियमों के विरुद्ध सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की है। यह याचिका उन्होंने अधिवक्ता नीरज सिंह के माध्यम से संविधान के अनुच्छेद 32 के अंतर्गत दाखिल की है।
मृत्युंजय तिवारी बनाम भारत संघ शीर्षक से दाखिल इस याचिका में यूजीसी के उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता का संवर्धन विनियम, 2026 के विशेष रूप से विनियम 3(ग) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है, जिसे 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया गया था।
याचिका में कहा गया है कि विनियम 3(ग) “जाति-आधारित भेदभाव” को केवल अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) तक सीमित करता है, जबकि सामान्य/गैर-अनुसूचित वर्ग के छात्रों और नागरिकों को यदि वे जाति-आधारित उत्पीड़न का सामना कर रहे हों तो उन्हें किसी भी कानूनी संरक्षण के दायरे से बाहर कर देता है।
याची का कहना है कि यह प्रावधान पीड़ित का कृत्रिम और असंवैधानिक वर्गीकरण करता है, यह मान लेता है कि जाति-आधारित भेदभाव केवल एक ही दिशा में होता है, और इस प्रकार संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव निषेध) एवं 21 (गरिमा और जीवन का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

























