
नई दिल्ली। यूनिवर्सिटी ग्रांट कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों पर चल रहे विवाद के बीच कवि डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने मंगलवार को एक्स पर स्व० रमेश रंजन की एक कविता पोस्ट कर यूजीसी एक्ट के विरोध में दर्द बयां किया है।
उन्होंने एक्स पर लिखा,
“चाहे तिल लो या ताड़ लो राजा,
राई लो या पहाड़ लो राजा,
मैं अभागा ‘सवर्ण’ हूं मेरा,
रौंया-रौंया उखाड़ लो राजा…।”
मालूम हो कि यूजीसी के नए समता नियमों पर सवर्ण समाज ने खुलकर विरोध शुरू कर दिया है। इस पर सरकार भी एक्शन में आ गई है और बीच का रास्ता निकालने के लिए मंथन शुरू किया है।
बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट ने दिया त्यागपत्र
यूजीसी के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हुआ हो गया है। इस विवाद ने उस वक्त तूल पकड़ लिया जब बरेली के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने इसके विरोध में इस्तीफा दे दिया। वह आज बरेली जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर धरने पर भी बैठ गए हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यूजीसी ने समता नियमों में बदलाव किया है। आइए जानते हैं कि समता संवर्धन नियमों में वो क्या बदलाव हैं जिन्हें लेकर विरोध बढ़ गया है…
भेदभाव के दायरे को विस्तार देना
- 2026 के नियमों में भेदभाव की परिभाषा को ज्यादा सख्त और विस्तृत किया गया है, जो 2012 के नियमों की तुलना में अधिक व्यापक है।
- जाति आधारित भेदभाव की परिभाषा का दायरा बढ़ाया गया है, जिसमें अब एससी, एसटी के अलावा ओबीसी के छात्रों और कर्मचारियों को भी शामिल किया गया है।
झूठी शिकायतों पर दंड हटाना
- 2012 के नियमों में झूठी शिकायतों पर जुर्माने और दंड के प्रावधान थे, लेकिन 2026 के नियमों में इसे हटा दिया गया है ताकि असली पीड़ित शिकायत करने से न डरें।
सख्त निगरानी तंत्र
- प्रत्येक उच्च शिक्षण संस्थान को समता दस्ते और समता दूत की नियुक्ति करनी होगी।
- भेदभाव के मामलों पर सात दिनों के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट देनी होगी।
- दंड विधि के तहत मामला बनता है तो पुलिस को तत्काल सूचित किया जाएगा।
संस्थानों पर जिम्मेदारी
- यदि संस्थान नियमों का पालन नहीं करते हैं तो यूजीसी दंडात्मक कार्रवाई कर सकता है, जैसे डिग्री, वित्तीय मदद या ऑनलाइन कोर्सों पर रोक लगाना।





























