
नईदिल्ली, २९ जनवरी ।
यूरोपीय संघ के साथ एफटीए वार्ता को अंतिम रूप देने के बाद भारत अपने एक अन्य मजबूत रणनीतिक साझेदार अमेरिका के साथ संबंधों पर ज्यादा फोकस कर रहा है। इसका उदाहरण है कि विदेश मंत्री एस जयशंकर अगले सप्ताह अमेरिका की यात्रा पर जा रहे हैं।जयशंकर वहां अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो की तरफ से क्रिटिकल मिनरल्स पर बुलाई गई सहयोगी देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान भारत पैक्स सिलिका नाम की अमेरिकी पहल का सदस्य बनेगा। जयशंकर और रूबियो की अलग से भी वार्ता होगी।वैसे अभी तक इस बात का कोई संकेत नहीं है कि भारत और अमेरिका के बीच कारोबारी समझौते को लेकर चल रही वार्ता पर सहमति बन गई है। इसके बावजूद जयशंकर की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच हालिया तनाव में कमी आने का संकेत है। पिछले एक महीने में अमेरिका के चार प्रमुख सांसद भारत की यात्रा पर आ चुके हैं। इन सांसदों ने जयशंकर समेत भारत के कुछ अन्य प्रमुख नेताओं से मुलाकात की है और द्विपक्षीय संबंधों में आए तनाव को दूर करने की जरूरत भी बताई है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों में चल रहे संवाद के क्रम में ही जयशंकर की भावी अमेरिका यात्रा को देखा जाना चाहिए। पैक्स सिलिका में भारत के शामिल होने की घोषणा अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने नई दिल्ली में की थी। इसकी दिसंबर 2025 में शुरुआत हुई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य अत्याधुनिक उद्योगों के लिए जरूरी तकनीकों में जरूरी दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति को सुरक्षित व भरोसेमंद बनाना है।इस बारे में हाल ही में अमेरिका के वित्त मंत्री की अध्यक्षता में एक बैठक बुलाई गई थी, जिसमें भारत का प्रतिनिधित्व रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने किया था। इसका एक अन्य मुख्य उद्देश्य दुर्लभ धातुओं की आपूर्ति के लिए चीन जैसे देशों पर निर्भरता कम करना भी है। जापान, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, ब्रिटेन, इजरायल, आस्ट्रेलिया जैसे देश इसके सदस्य हैं। सनद रहे कि भारत और अमेरिका के बीच कई महीनों से कारोबारी समझौते पर वार्ता चल रही है, लेकिन दोनों पक्षों में अभी तक सहमति नहीं बन पाई है।
इस बीच भारत ने न्यूजीलैंड के साथ एफटीए कर लिया है, जबकि यूरोपीय संघ के साथ वार्ता सफलतापूर्वक समाप्त हो गई है। ईयू व भारत ने एक दिन पहले ही एफटीए वार्ता समाप्ति का एलान किया है, जिस पर अमेरिका में कई तरह की प्रतिक्रियाएं आई हैं। अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि ने कहा है कि इस समझौते से भारत को ज्यादा फायदा होगा। दूसरी तरफ, भारत के साथ कारोबारी समझौता नहीं होने की वजह से ट्रंप प्रशासन के खिलाफ अमेरिका के भीतर ही आवाज उठ रही है।



















