
रांची। माओवादियों के विरुद्ध सुरक्षा बलों की सारंडा में आखिरी लड़ाई जारी है। आपरेशन मेगाबुरू में 17 माओवादियों को मार गिराने वाली टीम का हौसला बुलंद है। बचे हुए माओवादियों की तलाश में जवान हर दिन आगे बढ़ रहे हैं। ओडिशा सीमा व झारखंड की ओर से सुरक्षा बलों का घेरा कस रहा है।
झारखंड जगुआर (एसटीएफ), कोबरा, सीआरपीएफ व जिला बल के जवानों की घेराबंदी जारी है। झारखंड पुलिस व केंद्रीय बलों की दस अस्थाई कैंपों से माओवादियों की चौतरफा घेराबंदी की गई है।
माओवादियों के आने-जाने के सभी रास्ते सील हैं और वहां भारी संख्या में सुरक्षा बल तैनात हैं। रसद रोका गया है, माओवादी बौखलाहट में हैं। उनके पास दो ही रास्ते हैं, या तो वे आत्मसमर्पण कर दें या फिर सुरक्षा बलों से सामना करें।
ड्रोन से माओवादियों की गतिविधियों पर नजर
सुरक्षा बलों ने एक-एक करोड़ के दो हार्डकोर माओवादी मिसिर बेसरा व असीम मंडल सहित सभी 45 माओवादियों की घेराबंदी का दावा किया है, जिनके समापन के साथ ही झारखंड से माओवादियों के खात्मे की घोषणा हो जाएगी।
माओवादियों को खत्म करने की डेडलाइन मार्च 2026 है, लेकिन जिस तरह से सुरक्षा बलों की तैयारी है, उससे अनुमान लगाया जा रहा है कि बहुत जल्द ही सारंडा से बेहतर खबर आएगी कि माओवादियों का आखिरी किला भी ढह गया।



























