
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को एनजीटी के उस आदेश को बरकरार रखते हुए कहा कि यदि कोई कंपनी अपने बड़े पैमाने के कारोबार से अधिक लाभ कमाती है, तो उसे पर्यावरणीय लागतों के लिए अधिक जिम्मेदारी उठानी होगी। इस आदेश में पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाले एक बिल्डर पर पांच करोड़ रुपये का पर्यावरणीय मुआवजा लगाया गया था।
पीठ ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण से संबंधित मामलों में किसी कंपनी के परिचालन के पैमाने को पर्यावरणीय नुकसान से जोड़ना मुआवजे का निर्धारण करने में एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है।
अदालत ने कहा कि बड़े पैमाने का मतलब अक्सर अधिक संसाधनों का उपयोग, अधिक उत्सर्जन और अधिक अपशिष्ट होता है, जिससे पर्यावरण पर अधिक दबाव पड़ता है।
पीठ ने कहा कि यदि किसी कंपनी का टर्नओवर अधिक है, तो यह उसके संचालन के विशाल पैमाने को दर्शाता है। यदि ऐसी कंपनी पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाने में योगदान देती पाई जाती है, तो उसके टर्नओवर का नुकसान की मात्रा से सीधा संबंध हो सकता है।


















