
तुर्की ३१ जनवरी ।
ईरान को लेकर पश्चिम एशिया में तनाव अपने चरम पर पहुंचता दिख रहा है। एक ओर अमेरिका सैन्य कार्रवाई के संकेत दे रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने साफ कर दिया है कि किसी भी आक्रामक कदम का तत्काल और निर्णायक जवाब दिया जाएगा। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ट ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अमेरिका से बातचीत करने को तैयार है और हमारे साथ समझौता करना चाहता है। हालांकि, उन्होंने इस बारे में ज्यादा विवरण नहीं दिया। ईरान ने यूरोपीय संघ द्वारा इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कार्प्स को ब्लैकलिस्ट करने के जवाब में ईयू के सैन्य बलों को भी आतंकी घोषित करने की चेतावनी दी है। इसके साथ ही तुर्की के दौरे पर पहुंचे ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरकची ने कहा कि उनका देश तनाव घटाने के लिए अमेरिका से वार्ता को तैयार है, लेकिन ये बातचीत धमकियों के साए में नहीं हो सकती है। वहीं, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोआन ने ईरानी राष्ट्रपति से बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता का प्रस्ताव दिया है। इधर, अमेरिका ने प्रदर्शनकारियों पर दमनात्मक कार्रवाई के चलते ईरान के आंतरिक मंत्री इश्कंदर मोमेनी पर नए प्रतिबंध लगा दिए हैं। इससे पहले ईयू ने मोमेनी समेत उच्च रैंकिंग वाले अधिकारियों और न्यायिक व्यवस्था पर प्रतिबंध लगाए थे। गौरतलब है कि ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच 6479 लोग मारे गए हैं। दमनात्मक कार्रवाई रोकने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने न केवल ईरान पर हमलों की धमकी दी, बल्कि अमेरिकी जहाजी बेड़ा यूएसएस अब्राहम लिंकन और अन्य गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रायर को मध्य एशिया में में भेज दिया है। हालांकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप ईरान पर बल प्रयोग करेंगे या नहीं।विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे देश पर हमला क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक परमाणु हथियारों की होड़ को तेज कर सकता है। इससे अंतरराष्ट्रीय परमाणु अप्रसार व्यवस्था और आइएईए की विश्वसनीयता पर भी असर पडऩे की आशंका है। सऊदी अरब ने साफ कर दिया है कि ईरान ने परमाणु हथियार बनाए तो वह भी पीछे नहीं रहेगा।रॉयटर के अनुसार, ईरान ने संकेत दिए हैं कि जिन यूरोपीय देशों ने रिवोल्यूशनरी गार्ड को आतंकवादी संगठन घोषित किया है, उनकी सशस्त्र सेनाओं को भी आतंकवादी की श्रेणी में रखा जा सकता है।
ईरान के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी अली लारिजानी ने कहा कि इस फैसले के परिणाम यूरोपीय देशों को भुगतने होंगे। उन्होंने शुक्रवार को रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात भी की।ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने यूएई के राष्ट्रपति से बातचीत में कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन किसी भी आक्रमण का तुरंत और निर्णायक जवाब देगा। उन्होंने संवाद के लिए खुले रहने की बात भी कही, लेकिन शर्तों के साथ। क्षेत्रीय शक्तियों के बीचबचाव के बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने गुरुवार को कहा था कि वह ईरान के साथ बातचीत कर सकते हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरकची ने भी स्पष्ट किया है कि उनका देश अमेरिका से बातचीत को तैयार है, लेकिन इसमें ईरान की रक्षा क्षमताओं के साथ समझौता नहीं किया जा सकता है।
गौरतलब है कि ईरान के साथ बातचीत की अमेरिका की प्रमुख शर्त यही है कि ईरान अपना मिसाइल कार्यक्रम छोड़े। ईरान ने इस मांग को खारिज कर दिया था। हालांकि तुर्किये ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की पेशकश की है।ईरान ने यह भी चेताया कि वह बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन जरूरत पड़ी तो युद्ध के लिए भी पूरी तरह तैयार है। तुर्किये ईरान के खिलाफ सैन्य हस्तक्षेप का विरोध किया है और चेतावनी दी है कि इससे क्षेत्रीय अस्थिरता बढ़ सकती है।


















