
कोरबा। कटघोरा से कोरबा को जोडऩे वाले मुख्य मार्ग का निर्माण कार्य आखिरकार शुरू हो गया है, लेकिन राहत की जगह यह निर्माण अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जेन्जरा चौक से गोपालपुर तक की सडक़ लंबे समय से खस्ताहाल थी। गड्ढों और खराब सतह के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही थीं, लेकिन चूंकि इस मार्ग का निर्माण राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (हृ॥्रढ्ढ) द्वारा कराया जाना था, इसलिए लोक निर्माण विभाग (क्कङ्खष्ठ) ने भी वर्षों तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया।
अब जब निर्माण कार्य शुरू हुआ है, तो उसमें बरती जा रही लापरवाही ने स्थानीय लोगों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ा दी है। हृ॥्रढ्ढ ने इस सडक़ निर्माण का ठेका हरियाणा ठेकेदार की विश्वकर्मा इंटरप्राइजेस कंपनी को दिया है, लेकिन कंपनी द्वारा नियमों और मानकों को दरकिनार कर काम किया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार सडक़ निर्माण के नाम पर सडक़ किनारे बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई कर दी गई है। बिना स्पष्ट अनुमति और वैकल्पिक पौधारोपण की व्यवस्था के पेड़ों की ‘बलि’ चढ़ा दी गई, जिससे क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है। धनरास मार्ग पर छुरी खुर्द के समीप ठेकेदार कंपनी द्वारा एक अस्थायी ब्लीचिंग प्लांट लगाया गया है। इस प्लांट से निकलने वाली धूल और अन्य प्रदूषक तत्वों के कारण आसपास के गांवों और बस्तियों में वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ रहा है। लोगों को सांस लेने में तकलीफ, आंखों में जलन और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। निर्माण कार्य के दौरान सडक़ की खुदाई तो कर दी गई है, लेकिन नियमों के अनुसार पानी का नियमित छिडक़ाव नहीं किया जा रहा। नतीजा यह है कि पूरे मार्ग पर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। पैदल चलना तो दूर, दोपहिया और चारपहिया वाहन चालकों के लिए भी इस रास्ते से गुजरना मुश्किल हो गया है। स्कूली बच्चे, बुजुर्ग और मरीज सबसे ज्यादा परेशान हैं। स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा यह सब कुछ या तो हृ॥्रढ्ढ के नियमों को नजरअंदाज कर किया जा रहा है, या फिर हृ॥्रढ्ढ के अधिकारियों की मौन सहमति और संलिप्तता से ठेकेदार के हौसले बुलंद हैं।
यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो यह निर्माण कार्य भविष्य में और बड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। अब यह मामला केवल खराब निर्माण तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और आम जनता की सुरक्षा से भी जुड़ गया है। स्थानीय लोगों ने वन विभाग, राजस्व विभाग व जिला प्रशासन और हृ॥्रढ्ढ के उच्च अधिकारियों से पूरे मामले की जांच कर ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि नियमों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण सडक़ निर्माण हो और क्षेत्रवासियों को राहत मिल सके।















