
कोरिया बैकुंठपुर। कोरिया जिले के सोनहत विकासखंड अंतर्गत ग्राम केशगवां निवासी संतोष कुमार दुबे का परिवार इन दिनों गहरे संकट में है। दो बार ओपन हार्ट सर्जरी करवा चुके संतोष की आजीविका का एकमात्र साधन छिन जाने के बाद, उनके तीन पूर्णत: दिव्यांग बच्चों का भरण-पोषण मुश्किल हो गया है, जिससे उनके परिवार पर आर्थिक संकट के बादल छा गए हैं।
संतोष कुमार दुबे ने बताया कि वे स्वयं दो गंभीर ओपन हार्ट सर्जरी से गुजर चुके हैं, जिसके कारण उनकी शारीरिक क्षमता सीमित है। इस गंभीर स्वास्थ्य स्थिति के बावजूद, वे अपने परिवार का सहारा बने हुए थे। उनकी चिंता का मुख्य कारण उनके तीन बच्चे हैं, जो दुर्भाग्यवश पूर्णत: दिव्यांग हैं और जिन्हें निरंतर देखभाल, विशेष पोषण तथा चिकित्सा आवश्यकताओं की पूर्ति की आवश्यकता होती है। यह स्थिति पहले से ही परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। संतोष ने बताया कि गत 23 जून 2023 को बैकुंठपुर में बाल संरक्षण आयोग दिल्ली द्वारा आयोजित एक शिविर के दौरान उनकी समस्या सामने आई थी। आयोग ने उनकी और उनके बच्चों की दयनीय स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, उन्हें जनपद पंचायत सोनहत में आकस्मिक व्यवस्था के तहत कार्य पर रखने की सिफारिश की थी। यह रोजगार उनके परिवार के लिए एक जीवन रेखा साबित हुआ, जिससे उनके बच्चों के इलाज, दवाइयों और दैनिक भोजन की व्यवस्था सुचारू रूप से चल रही थी। लगभग एक वर्ष तक मिली इस सहायता से परिवार को कुछ राहत मिली थी और वे आर्थिक रूप से स्थिर हो पाए थे। परंतु, लगभग एक वर्ष बाद उन्हें इस आकस्मिक कार्य से अचानक निकाल दिया गया है। इस अप्रत्याशित कदम ने उनके घर की स्थिति को अत्यंत दयनीय बना दिया है। संतोष कुमार दुबे ने मार्मिक अपील करते हुए कहा, ‘मेरी दो बार ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी है और मेरे तीन बच्चे पूर्णत: दिव्यांग हैं। मेरे पास उनके भरण-पोषण के लिए कोई साधन नहीं बचा है। पहले जब मैं जनपद पंचायत सोनहत में कार्य पर था, तब मेरे बच्चों का इलाज और खाने-पीने का व्यवस्था ठीक चल रहा था, लेकिन अब स्थिति बहुत खराब हो चुकी है।

























