
केरल, १० फरवरी ।
इरादे बुलंद हों तो तमाम बाधाओं के बावजूद सफलता जरूर मिलती है। पंखों से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है। केरल की दृष्टिबाधित तान्या नाथन ने इस बात को चरितार्थ कर दिखाया है। तान्या ने दिव्यांगता के बावजूद सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षा में दिव्यांग श्रेणी में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है।वह संभवत: देश की पहली दृष्टिबाधित जज होंगी। केरल हाई कोर्ट ने चयन सूची राज्य सरकार को भेज दी है, जो अब नियुक्ति आदेश जारी करेगी। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष जब दिव्यांगों को न्यायिक सेवा में प्रवेश की अनुमति दी, जिससे 24 वर्षीय तान्या को अपने सपनों को साकार करने का मौका मिला। कन्नूर जिले के मंगड की निवासी तान्या ने ला में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने के बाद न्यायिक सेवा की परीक्षा की तैयारी की। उन्हें मेहनत का फल मिला और अब वह केरल की पहली दृष्टिबाधित न्यायाधीश बनने जा रही हैं।
नियुक्ति पत्र आने का इंतजार कर रही तान्या ने कहा कि वह इस पेशे की चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं। तान्या ने कहा, मुझे पता है कि यह चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन तकनीक के विकास के कारण अधिकांश न्यायिक कार्य स्क्रीन रीडर और डिक्टेशन साफ्टवेयर जैसे मददगार उपकरणों का इस्तेमाल करके किए जा सकते हैं। जन्म से ही दृष्टिबाधित तान्या ने अपनी पढ़ाई धर्मडोम के दिव्यांग छात्रों के स्कूल से शुरू की। उन्होंने परासिनीकडावु उच्च माध्यमिक स्कूल से 10वीं तक और मोराझा राजकीय उच्चतर माध्यमिक स्कूल से 12वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। कन्नूर विश्वविद्यालय में एलएलबी पाठ्यक्रम में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। वह संस्थान में दृष्टिबाधित एकमात्र छात्रा थीं।उन्होंने वकील के तौर पर पंजीकरण कराने के बाद कन्नूर के थालीपरंबा में वकालत शुरू की। इसी दौरान 2025 में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस आर. महादेवन ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए दिव्यांगों को न्यायिक सेवा में प्रवेश की अनुमति दी। तान्या ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले ने मुझे परीक्षा की अधिसूचना जारी होने पर आवेदन करने के लिए प्रेरित किया। तान्या ने परीक्षा की तैयारी अपने दम पर की। ब्रेल लिपि का उपयोग करके खुद ही नोट्स तैयार किए। साक्षात्कार के लिए उन्होंने तिरुअनंतपुरम में एक वकील से मार्गदर्शन लिया।






















