
जांजगीर-चांपा। नाबालिग से दुष्कर्म करने वाला आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित कया गया है। -उक्त फैसला अपर सत्र न्यायाधीश एफटीएससी रविन्दर कौर ने सुनाया है।
अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार पीडिता के पिता ने 13 अगस्त 2024 को थाना जांजगीर में लिखित शिकायत प्रस्तुत की, कि उसकी नाबालिग पुत्री छात्रावास में रहकर कक्षा दसवी की पढ़ाई कर रही है। इसी दौरान 13 अगस्त को उसकी पुत्री छात्रावास से घर आई हुई थी और रो रही थी तथा उसने प्रार्थी एवं उसकी पत्नी को बताया कि उक्त दिनांक से चार माह पूर्व पीडिता की जान पहचान तिलई निवासी अलेकजेंडर सूर्यवंशी पिता सम्पत सूर्यवंशी उम्र 23 वर्ष से हुई थी। उसने नाबालिग को प्रेमजाल में फंसाकर उससे बातचीत करने लगा था। इस दौरान उसके द्वारा पीडिता को मोबाईल, कपड़े और अन्य उपहार दिये गये है। अभियुक्त ने पीडिता को शादी का प्रलोभन देता था, तब पीडिता उसकी बातों में आ गई। अभियुक्त अपनी मोटर सायकल पर पीडिता को अपने साथ घुमाने के लिए ले गया था और फिर उसके बाद पीडिता को अपने घर ग्राम तिलई लेकर गया था। वहां पर वह पीडिता को शादी करूंगा कहकर उसके दुष्कर्म साथ किया। प्रार्थी की उक्त लिखित शिकायत के आधार पर अभियुक्त के विरूद्ध थाना जांजगीर में धारा 376-26, 506 भारतीय दंड संहिता एवं धारा 6 पाक्सो एक्ट के तहत प्रथम सूचना दर्ज की गयी। तत्पश्चात विवेचना पूर्ण कर अभियोग पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इस मामले में संपूर्ण साक्ष्य उपरांत अपर सत्र न्यायाधीश एफटीएससी रविन्दर कौर ने आरोपी को 20 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। इस मामले की पैरवी विशेष लोक अभियोजक पाक्सो चंद्रप्रताप सिंह ने की।



















