
जांजगीर। नगरपालिका जांजगीर-नैला क्षेत्र के सीमा क्षेत्र में आने वाले सभी घरों पर डिजिटल डोर नंबर लगाए जाएंगे। हर मकान को एक यूनिक आईडी नंबर दिया जाएगा। इससे लोगों को टैक्स जमा करने के लिए कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डिजिटल प्लेट को स्कैन करके प्रॉपर्टी टैक्स के अलावा अन्य सुविधाएं भी प्राप्त की जा सकेंगी। इस योजना की तैयारी शुरू हो चुकी है।
वल्र्ड बैंक द्वारा पोषित प्रॉपर्टी टैक्स एनहांसमेंट परियोजना के तहत निकायों में यह सुविधा शुरू की जा रही है। नागरिक घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से संपत्ति कर, जलकर और यूजर चार्ज जमा कर सकेंगे। राज्य शहरी विकास अभिकरण विभाग ने नगर पालिका को पत्र जारी कर कहा है कि प्रत्येक घर में डिजिटल डोर नंबर लगाने से पूर्व कॉलोनी-क्षेत्र की सीमा का निर्धारण जीआईएस पोर्टल पर करना आवश्यक है।विभाग ने परियोजना में कार्यरत क्रियान्वयन एजेंसी के प्रतिनिधियों को आवश्यक सहयोग कर कॉलोनी/क्षेत्र की सीमा निर्धारण का कार्य पूर्ण करें और सूडा कार्यालय को 5 दिवस की समयावधि में कार्यवाही करने कहा है। घरों में डिजिटल डोर नंबर लगाने का काम भी तेजी से पूरा करना होगा।ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा के लिए बैंक के साथ पेमेंट गेटवे इंटीग्रेशन किया जाएगा। प्रोजेक्ट के तहत तमाम शुल्क जमा करने की प्रक्रिया को पूरी तरह से ऑनलाइन होगा। घरों में लगे डिजिटल कोड से मकान मालिक का नाम, पता और लोकेशन तत्काल मिल जाएगी। एक क्लिक से ही पता चल जाएगा कि कितने मकान कौन सी कॉलोनी में है। मकान मालिक टैक्स जमा कर रहा है या नहीं, इसकी भी जानकारी मिनटों में मिल जाएगी। कचरा गाड़ी घरों तक जाती है या नहीं।शहर के 40561 हजार लोगों को होगा फायदा शहर की जनसंख्या करीब 40561 के आसपास है। परियोजना का उद्देश्य नगरीय निकायों की आय बढ़ाना है। साथ ही करदाताओं को बेहतर सुविधा देना भी इसका मकसद है। सॉफ्टवेयर के जरिए संपत्तियों का डेटा अपडेट रहेगा। इससे गलतियों की संभावना कम होगी। शासन का मानना है कि इससे कर संग्रहण में बढ़ोतरी होगी और नगरीय सेवाएं बेहतर होंगी। वल्र्ड बैंक की मदद से तैयार यह पोर्टल नगरीय प्रशासन विभाग की निगरानी में संचालित होगा।






















