छात्रों के ‘बुजुर्ग नायक’ यूनुस की नई भूमिका पर सवाल, नई सरकार के लिए क्या है चुनौती?

नई दिल्ली। बांग्लादेश में पिछले एक वर्ष से जारी राजनीतिक उथल-पुथल आम चुनावों के साथ थमती दिख रही है और इसी के साथ अंतरिम प्रशासन के प्रमुख रहे मुहम्मद यूनुस के भविष्य को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। बीते डेढ़ साल में देश की बागडोर संभालने वाले यूनुस ने अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण चुनाव संपन्न कराकर राहत की सांस ली है, पर अब उनकी भूमिका क्या होगी यह सवाल राजनीतिक हलकों में प्रमुख है। चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज हो गई है और पार्टी प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व में नई सरकार बनने की संभावना है।

अगस्त 2024 में छात्र आंदोलन और राजनीतिक संकट के बीच यूनुस ने विदेश से लौटकर अंतरिम प्रशासन की कमान संभाली थी। उस समय देश में कानून-व्यवस्था, महंगाई और निवेश पलायन जैसी चुनौतियां चरम पर थीं। यूनुस ने खुद को ‘केयरटेकर’ तक सीमित रखा और किसी दलगत राजनीति से दूरी बनाए रखी।

मोहम्मद यूनुस का कार्यकाल

उनके कार्यकाल में प्रशासनिक फेरबदल, चुनावी ढांचे की पारदर्शिता और सुरक्षा प्रबंधन पर विशेष जोर दिया गया, जिसके चलते मतदान अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रहा और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने प्रक्रिया को विश्वसनीय बताया।सुधारवादी भरोसेमंद की छवि यूनुस की पहचान केवल चुनाव प्रबंधन तक सीमित नहीं रही।

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