
गुरुग्राम। साइबर सिटी के डॉक्टरों ने एंड-स्टेज हार्ट फेलियर से जूझ रहे उज्बेकिस्तान के एक 14 साल के लड़के को मैकेनिकल हार्ट (LVAD) लगाकर नई जिंदगी दी है। वह भारत का सबसे कम उम्र का बच्चा बन गया है जिसे लेफ्ट वेंट्रिकुलर असिस्ट डिवाइस (LVAD) सफलतापूर्वक लगाया गया है।
आर्टेमिस हॉस्पिटल्स में पीडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी के चीफ डॉ. असीम आर. श्रीवास्तव ने बताया कि लड़का पिछले 10 सालों से डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी से जूझ रहा था। यह कंडीशन हार्ट की मसल्स को कमजोर कर देती है और शरीर के अंगों तक खून की सही सप्लाई को रोकती है।
पिछले एक साल में उसकी हालत लगातार बिगड़ती गई। उसे मामूली हरकतों में भी सांस लेने में दिक्कत होने लगी, जिसके कारण उसे बार-बार ICU में भर्ती कराना पड़ा। एक बार वह कार्डियोजेनिक शॉक में चला गया, जिससे लिवर और किडनी फेल हो गए।
उसने बताया कि उसके देश में एडवांस इलाज उपलब्ध न होने के कारण उसका परिवार उसे दो महीने पहले गुरुग्राम ले आया था। वह हार्ट ट्रांसप्लांट के लिए वेटिंग लिस्ट में था, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती देख डॉक्टरों ने रिस्क लेने और LVAD इम्प्लांट करने का फैसला किया। एक मुश्किल सर्जरी के दौरान, मैकेनिकल पंप को हार्ट के मेन पंपिंग चैंबर और एओर्टा से जोड़ा गया।



























