
जमीनी सच्चाई परखने गए चार पत्रकार फंसे
कोरबा। कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज अंतर्गत उपस्थित 40 हाथियों ने धोबीबारी गांव में पांच घरों को तहस-नहस कर कई सामान और राशन को चौपट कर दिया। ग्रामीणों ने यहां-वहां शरण ली है। उनके सामने मौजूदा हालात में जिंदा रहने की चुनौती है। इलाके की जमीनी सच्चाई को परखने गए अंचल के चार पत्रकार बीती रात हाथियों की चिंघाड़ सुनकर एक स्थान पर फंसे रहे। सुबह होने के इंतजार में उन्हें महसूस हुआ कि ऐसी रातें बहुत लंबी होती है।
वन विभाग के द्वारा गठित किए गए हाथी मित्रदल और अमले की निगरानी संबंधित कोशिशों ने सवाल खड़े किए हैं कि मैदानी वन अमला कितना अलर्ट रहता है। पूरी रात इलाके में कोई जिम्मेदार अमला नजर नहीं आया। कटघोरा वनमंडल के जटगा रेंज अंतर्गत धोबीबारी में दो दिन पहले हाथियों के दल ने भारी तबाही मचाई। करीब 10 घरों को तोड़ दिया गया और कुछ पालतू जानवरों को भी मार डाला गया। गरीब परिवारों का आशियाना उजड़ गया और अब वे खुले आसमान के नीचे पेड़ों के सहारे रात गुजारने को मजबूर हैं। हाथियों द्वारा मचाई गई तबाही की चर्चा जिले के साथ प्रदेश में हो रही है। इस घटना के बाद इलाके में क्या कुछ हालात हैं इसे कव्हर करने कटघोरा से पत्रकार-शारदा पाल, नानक सिंह राजपूत, लक्ष्मण महंत और हरीश साहू भी ग्रामीणों के साथ खतरे में घिर गए। हाथियों ने इलाके से निकलने का एकमात्र रास्ता ही रोक दिया, जिससे सभी लोग घंटों तक अंधेरे में सांसत भरी स्थिति में फंसे रहे। हाथियों की चिंघाड़ और लगातार मूवमेंट के बीच ग्रामीण और पत्रकार पूरी रात भय के साए में रहे। किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचकर सभी ने राहत की सांस ली। लगातार हो रहे नुकसान और समय पर मदद न मिलने से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि हाथियों की मौजूदगी की जानकारी होने के बावजूद समय पर चेतावनी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं की जाती।

























