
नईदिल्ली, १६ फरवरी ।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हालिया व्यापार समझौते अधिक प्रतिस्पर्धी घरेलू उद्योग, आत्मविश्वास से भरपूर दृष्टिकोण और खुले विचारों का नतीजा हैं। व्यापार समझौतों की बात करने से पहले यह याद करना अहम है कि देश एक दशक पहले कहां खड़ा था।पूर्ववर्ती संप्रग सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उसके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत व्यापार वार्ताओं में मजबूती से अपना पक्ष नहीं रख सका और एक भी बातचीत निष्कर्ष तक नहीं पहुंच सकी। प्रधानमंत्री ने पीटीआई से एक साक्षात्कार में ट्रेड डील, आम बजट, रक्षा सुधार, विकसित भारत में महिलाओं की भूमिका से लेकर अगले तीन दशकों के लिए अपनी तीन शीर्ष प्राथमिकताएं भी गिनाईं। मोदी ने कहा कि भारत ने आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, ईयू और अमेरिका के साथ जो व्यापार समझौते किए हैं, उनसे एमएसएमई के लिए, खास तौर पर श्रम-प्रधान क्षेत्रों में, इन देशों में लगभग शून्य शुल्क या अन्य देशों की तुलना में काफी कम शुल्क पर वस्तुओं के निर्यात के रास्ते खुल गए हैं। पिछली संप्रग सरकार ने अपने शासनकाल में कुछ व्यापार समझौते करने की कोशिश की, लेकिन यह यात्रा अनिश्चितता और अस्थिरता से भरी रही। मुख्यत: उनके आर्थिक कुप्रबंधन के कारण भारत मजबूती के साथ अपना पक्ष नहीं रख सका। उन्होंने बातचीत को निष्कर्ष तक पहुंचाने के लिए अनुकूल माहौल नहीं बनाया। बातचीत शुरू होती और फिर ठप पड़ जाती थी और कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल पाता था।
सत्ता में आने के बाद हमने नीति-आधारित शासन के जरिये आर्थिक पुनरुत्थान किया, आर्थिक ढांचे को मजबूत किया और एक नियम-आधारित प्रणाली का निर्माण किया। जब हमने राजनीतिक स्थिरता, नीतिगत पूर्वानुमान और सुधार-केंद्रित दृष्टिकोण सुनिश्चित किया, तो दुनिया भारत में निवेश करने के लिए इच्छुक हो गई। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार की ओर से किए गए सुधारों से भारत के विनिर्माण और सेवा जैसे दोनों क्षेत्रों को मदद हासिल हुई तथा एमएसएमई के बीच उत्पादकता एवं प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा मिला।
आत्मविश्वास से भरपूर, प्रतिस्पर्धी और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के रूप में भारत के उभार के कारण कई देशों को भारत के साथ व्यापार समझौतों पर आगे बढऩे में फायदा दिखा। उन्होंने कहा, अब हमारे 38 साझीदार देशों के साथ एफटीए हैं, जो भारत के व्यापारिक इतिहास में एक बहुत बड़ा मील का पत्थर है। इन व्यापार समझौतों की एक खास बात यह है कि ये कई महाद्वीपों में फैले हुए हैं और इनमें अलग-अलग आर्थिक ताकत वाले देश शामिल हैं। हमारे देश में एक नया आत्मविश्वास है। अलग-अलग तरह की चुनौतियों के समय में भी हमारा राष्ट्रीय चरित्र सामने आया है और हम मुश्किल वैश्विक हालात में भी वृद्ध की चमकती हुई किरण हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि राजग सरकार सुधारों के लिए प्रतिबद्ध है, जिसे उसने सही मायनों में करके दिखाया है। उनकी सरकार की रिफार्म एक्सप्रेस से आम लोगों को बहुत फायदा हो रहा है। अगले तीन दशकों के लिए उनकी शीर्ष तीन प्राथमिकताएं होंगी- लगातार ढांचागत सुधार, नवाचार को बढ़ाना एवं शासन को और आसान बनाना। मोदी ने यह भी कहा कि स्वभाव से वह कभी संतुष्ट नहीं होते क्योंकि उनका मानना है कि सार्वजनिक जीवन में एक तरह की रचनात्मक बेचैनी, और अधिक करने की लगातार इच्छा, तेजी से सुधार करने और बेहतर सेवा करने की आवश्यकता होती है। प्रधानमंत्री ने कहा कि हाल में पेश केंद्रीय बजट में जानबूझकर अल्पकालिक लोकलुभावन घोषणाओं से बचा गया। इसके बजाय नौकरियों और सतत वृद्धि को बढ़ावा देने के लिए बुनियादी ढांचे में रिकार्ड पूंजीगत आवंटन किया गया। मोदी ने कहा कि उनकी सरकार ने अपने कार्यकाल का इस्तेमाल पिछली सरकारों द्वारा छोड़ी गई ढांचागत खामियों को दूर करने, बड़े सुधार करने और विकसित भारत की नींव रखने के लिए किया है। यह बजट उस यात्रा के अगले स्तर को प्रदर्शित करता है। उन्होंने कहा, हमारा कोई भी बजट एक आम बही खाता बनाने के नजरिये से नहीं बनाया गया है.. अगर कोई पिछले 25 वर्षों में मेरे नजरिये को करीब से देखे तो यह साफ हो जाता है कि हमारा काम टुकड़ों में नहीं होता। इस साल का बजट मजबूरी के कारण पैदा हुआ अभी नहीं तो कभी नहीं वाला पल नहीं था, बल्कि तैयारी और प्रेरणा से उपजा हम तैयार हैं वाला क्षण था। यह बजट एक विकसित राष्ट्र बनने की भारत की प्रबल इच्छा को रेखांकित करता है। डाटा सेंटर में निवेश को बढ़ावा देने के लिए बजट में नए प्रोत्साहनों का उल्लेख करते हुए मोदी ने भारत को डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और एआई के ग्लोबल हब के तौर पर भी पेश किया। उन्होंने कहा कि देश दुनिया का डाटा होस्ट करने और तकनीकी क्रांति की अगली लहर का नेतृत्व करने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री ने कहा, हम पूरी दुनिया के डाटा को भारत आने के लिए आमंत्रित करते हैं!
”प्रधानमंत्री ने कहा कि 2047 तक विकसित भारत की ओर अगला कदम इस बात पर निर्भर करेगा कि भारतीय कंपनियां कितनी हिम्मत से नवाचार में निवेश करती हैं, दीर्घकालिक क्षमता स्थापित करती हैं और खुद को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, तकनीक के मामले में विश्वसनीय और ग्रोथ के सामाजिक रूप से जिम्मेदार इंजन के तौर पर स्थापित करती हैं। प्रधानमंत्री ने प्रगतिशील निजी क्षेत्र से अनुसंधान एवं विकास में और अधिक तेजी से निवेश करने, आधुनिकतम तकनीक अपनाने, आपूर्ति श्रृंखला क्षमताओं को मजबूत करने और सुरक्षित लाभ के बजाय गुणवत्ता व उत्पादकता के स्तर पर मुकाबला करने की अपील की।मोदी ने कहा कि विकसित भारत बनाने में महिलाओं की सबसे अहम भूमिका होगी और सरकार की पहल उन्हें मजबूत बनाएगी। गर्व की बात है कि पिछले कुछ वर्ष से भारतीय महिलाएं विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ रही हैं। चाहे वह अंतरिक्ष हो या स्टार्ट-अप। उन्होंने कहा कि यह देश के लिए गर्व की बात है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौ बजट पेश किए और पूरे भारत में कई महिलाएं इस कामयाबी से प्रेरित महसूस कर रही हैं।रक्षा बजट में बढ़ोतरी और सैन्य आधुनिकीकरण पर मोदी ने कहा कि एक दशक के रक्षा सुधारों के फायदे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान साफ दिखे और कहा कि भारत को सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए हर समय तैयार रहना होगा। एक ऐसे देश के तौर पर जो दुनिया में तेजी से अहम भूमिका निभा रहा है, भारत की यह जिम्मेदारी है कि वह अपने रक्षा क्षेत्र को मौजूदा हकीकत के हिसाब से आधुनिक बनाए।





















