बिरनपुर हिंसा मामला: 17 आरोपी दोषमुक्त, CM साय बोले- न्यायालयीन प्रक्रिया

रायपुर। प्रदेश के बहुचर्चित बिरनपुर हिंसा मामले में बड़ा न्यायालयीन फैसला सामने आया है। Bemetara District Court ने मामले में विचारण के उपरांत 17 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त करार दिया है। फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai ने कहा कि यह पूरी तरह न्यायालयीन प्रक्रिया है और न्यायालय अपने हिसाब से कार्य करता है। मामले की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश Sakshi Dixit की अदालत में हुई। न्यायालय में अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 64 साक्षियों के कथन दर्ज किए गए। लंबी सुनवाई और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद अदालत ने आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए सभी 17 व्यक्तियों को दोषमुक्त कर दिया। फैसले के साथ ही यह प्रकरण एक बार फिर चर्चा में आ गया है, क्योंकि घटना के समय पूरे प्रदेश में इसे लेकर व्यापक सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।
उल्लेखनीय है कि बिरनपुर हिंसा की शुरुआत दो बच्चों के बीच हुए मामूली विवाद से हुई थी। यह विवाद धीरे-धीरे बढ़ते हुए सामुदायिक तनाव में बदल गया और हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच हिंसक झड़प की स्थिति बन गई। 8 अप्रैल 2023 को साजा विधायक Ishwar Sahu के 22 वर्षीय पुत्र भुनेश्वर साहू की लाठी-डंडों से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस घटना ने पूरे क्षेत्र में तनाव को चरम पर पहुंचा दिया था। हत्या के बाद हालात तेजी से बिगड़े। 10 अप्रैल को Vishva Hindu Parishad ने छत्तीसगढ़ बंद का आह्वान किया। बंद और विरोध प्रदर्शनों के बीच बिरनपुर गांव में आगजनी और हिंसा की घटनाएं हुईं। इसी दौरान मुस्लिम समुदाय के रहीम (55) और उनके पुत्र ईदुल मोहम्मद (35) की भी हत्या कर दी गई। लगातार बढ़ते तनाव को देखते हुए प्रशासन ने क्षेत्र में धारा 144 लागू कर दी, जो लगभग दो सप्ताह तक प्रभावी रही।
घटना के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच में 12 लोगों को आरोपी बनाया था। बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच Central Bureau of Investigation को सौंपी गई। सीबीआई की विवेचना में छह नए आरोपियों का उल्लेख किया गया, जिससे जांच का दायरा और व्यापक हुआ। जांच एजेंसियों ने डिजिटल साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य तकनीकी तथ्यों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की। न्यायालय के ताजा फैसले के बाद विभिन्न स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। संदेह का लाभ भारतीय न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है, जिसके तहत पर्याप्त और ठोस साक्ष्य के अभाव में आरोपी को दोषमुक्त किया जा सकता है। वहीं, प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं और तथ्यों की समीक्षा जारी रहेगी। बिरनपुर हिंसा प्रकरण ने उस समय प्रदेश की कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। अब न्यायालय के इस निर्णय के बाद प्रकरण के कानूनी पहलुओं पर नई बहस शुरू हो गई है। सरकार और जांच एजेंसियां आगे की प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं, जबकि स्थानीय स्तर पर भी फैसले को लेकर चर्चा का माहौल है।

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