कांग्रेस ने किया जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव

जांजगीर-चांपा। जिला कांग्रेस कमेटी जांजगीर चांपा द्वारा मनरेगा कानून में बदलाव और किसानों का पूरा धान नहीं खरीदने के विरोध में मंगलवार को कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया गया । छत्तीसगढ़ में मनरेगा का नाम बदले जाने और किसानों का पूरा धान नहीं खरीदने का कांग्रेस लगातार विरोध कर रही है, जांजगीर में कांग्रेस ने सभा का आयोजन करने के पश्चात पैदल मार्च निकलकर जिला कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया । मोदी सरकार ने मनरेगा योजना का नाम बदलकर महात्मा गांधी जी के बताए गए रास्ते को भूलने का घिनौना प्रयास किया है, नाम बदले जाने का कांग्रेस विरोध कर रही है । जांजगीर में इस मुद्दे पर कांग्रेस नेताओं ने पैदल मार्च निकाला और कलेक्टर कार्यालय का घेराव किया। कांग्रेस नेताओं ने मदनलाल पेट्रोल पंप से पैदल मार्च करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए बड़ी संख्या में कांग्रेसी कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे।
इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि मनरेगा कोई साधारण योजना नहीं, बल्कि जन आंदोलनों से निकला कानून है। यह ‘हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो’ के सिद्धांत पर आधारित है। इस कानून ने ग्रामीणों को 100 दिन के रोजगार की कानूनी गारंटी दी, महिलाओं और भूमिहीन मजदूरों को सशक्त किया और गांवों में विकास को मजबूती दी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय जांगिड़ ने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह एवं सोनिया गांधी के द्वारा मजदूरों के हितों में मनरेगा योजना लाई गई थी। इसमें मजदूरों को 100 दिन का रोजगार दिया जाता था। अब मोदी सरकार इसे षडयंत्रपूर्वक बदलने का काम कर रही है, इसमें हम स्वीकार नहीं करेंगे ।
मनरेगा को लेकर विधायक व्यास कश्यप ने कहा है कि नया प्रस्ताव रोजगार की कानूनी गारंटी को खत्म कर मांग आधारित अधिकार की जगह केंद्र नियंत्रित योजना लागू करना चाहता है। इससे न तो काम की गारंटी रहेगी और न ही समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा। आपदा या आर्थिक संकट के समय ग्रामीणों को रोजगार सुरक्षा भी नहीं मिलेगी।
विधायक राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि मोदी सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने मनरेगा के नाम को बदलकर जो योजना लाने का काम किया है, उसमें राज्य सरकार को 40 फ़ीसदी की राशि देने को कहा है जब राज्य सरकार के पास पैसे नहीं है, तो यह योजना कैसे चल सकती है । हालत यह है कि राज्य में प्रदेश सरकार के कोई भी कार्य नहीं हो रहे है तो 40 फीसदी राशि राज्य सरकार कहां से देगी ।
विधायक शेषराज हरबंश ने कहा कि भाजपा नाथूराम गोडसे के महिमामंडन की राजनीति के तहत गांधी जी की स्मृति को कमजोर करना चाहती है। उन्होंने कहा कि किसी योजना से गांधी जी का नाम हटाने से उन्हें देश की चेतना से अलग नहीं किया जा सकता। गांधी जी भारत के जन-जन में बसे हैं।
विधायक बालेश्वर साहू ने साफ ऐलान किया है कि वह इस योजना को बदले जाने के खिलाफ हैं । मोदी सरकार इस योजना को अपने मूल स्वरूप में जब तक वापस लाने का काम नहीं करती है तब तक हमारा विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा ।
कलेक्टोरेट घेराव कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला कांग्रेस अध्यक्ष राजेश अग्रवाल ने कहा कि मनरेगा जैसी जनकल्याणकारी योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना एक सोची-समझी राजनीतिक साजिश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार महापुरुषों के नाम और विचारधारा को खत्म करने की कोशिश कर रही है। साथ ही केंद्र सरकार राज्यों पर आर्थिक बोझ डालकर अपनी जिम्मेदारियों से बच रही है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव गरीबों के ‘काम के कानूनी अधिकार’ को कमजोर करने का प्रयास है।कांग्रेस नेताओं ने यहां कलेक्टर दफ्तर का घेराव किया और कलेक्टर को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा। इस मौके पर दिनेश शर्मा, रमेश पैगवार, रामविलास राठौर,सुनील साधवानी, हरीश पांडे, जय थवाईत, हरीश सीतलानी, डॉ पारस शर्मा, अजीत सिंह राणा, अजीत साहू, नागेंद्र गुप्ता, गुलशन सोनी, देव कुमार पांडे, मनरेगा प्रभारी विजय केसरवानी, संदीप यादव, दिनेश शर्मा, मंजू सिंग, मोतीलाल देवांगन, रघुराज पांडेय, गिरधारी यादव, संदीप अग्रवाल, हरप्रसाद साहू समेत बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे । रैली में पहुंचे किसान, मजदूरों ने कलेक्टर कार्यालय के सामने लगाए गए टिन शेड को तोडऩे का प्रयास किया और भारी आक्रोश जताया । कांग्रेस के आला नेताओं ने देश के राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा ।

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