
जांजगीर-चांपा। जिले में 3 साल से बेशकीमती लकड़ी की तस्करी हो रही थी। इधर वन विभाग के जिम्मेदार अफसरों को जानकारी ही नहीं थी। 3 साल से दूसरे जिले से खैर व तेंदू की लकड़ी पहुंच रही है। इधर वन विभाग के अधिकारी गंभीर नींद में हैं। दफ्तर से निकलने फुर्सत ही नहीं है। रायगढ़ वन विभाग की सूचना पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 10 से 12 ट्रक खैर व तेंदू की लकड़ी जब्त की गई। अगरसूचना नहीं देते तो शायद यह कार्रवाई भी नहीं होती। ज्ञात हो कि पहले पेड़ों को सूखाने और फिर उसे काटकर चोरी कर लेने का काम लकड़ी तस्करों द्वारा धड़ल्ले से किया जा रहा है। ये सब काम फॉरेस्ट अफसरों के नाक के नीचे से हो रहा है लेकिन वे चैन की नींद ले रहे हैं। तस्कर बेशकीमती पेड़ों को सूखाने के लिए पहले उसकी छाल को छिल देते हैं। जिले में सागौन सहित अन्य पेड़ों की कटाई भी धड़ल्ले से हो रहा है। ऐसे में पेड़ सूख जाता है। कुछ दिन बाद जब पेड़ सूख जाते हैं तो तस्कर बड़ी आसानी से काटकर इन्हें ले जाते हैं। लंबे समय से यह खेल लकड़ी तस्करों द्वारा खेला जा रहा है लेकिन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी मौन साधे हुए हैं। वर्तमान में दूसरे जिले से बेशकीमती लकड़ी का तस्करी किया जा रहा है। रायगढ़ में जिले से खैर व तेंदू की लकड़ी का 3 साल से तस्करी हो रही थी। लेकिन जिले के वन विभाग के अफसरों को भनक तक नहीं लगी। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है, वे अपने कार्य को किस तरह अंजाम दे रहे है। केवल दफ्तर में बैठकर कुर्सी तोड़ रहे हैं। उनको बाहर निकलने की फुर्सत ही नहीं हैं। मंगलवार को नवागढ़ विकासखंड के गांव भादा में बड़ी कार्रवाई की गई।
दूसरे दिन कोई कागजात नहीं कर सके प्रस्तुत
बुधवार वन विभाग की टीम पहुंची तो लकड़ी तस्कर सरसीवा निवासी मनीष अग्रवाल को वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने कहा। जिस पर मनीष द्वारा को दस्तावेज प्रस्तुत करने की बात कही गई थी। लेकिन बुधवार को कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। इससे स्पष्ट है कि उसके पास इनका कोई वैध दस्तावेज ही नहीं है। बड़ा सवाल यह भी उठता है कि सरसीवा निवासी जिले के एक गांव में किराए के मकान लेकर इतना बड़ा तस्करी का काम कैसे कर रहा था। आखिर इसका मास्टरमाइंड कौन है।
यह बड़ी कार्रवाई रायगढ़ वन विभाग की सूचना पर हुई। वन विभाग की टीम पीछे करते हुए जांजगीर पहुंची और जानकारी दी गई। इतना बड़ा तस्करी चल रहा थी। साथ ही लकड़ी को यहां गोदाम में रखकर कटाई छंटाई करने के बाद विदेश तक सप्लाई करने की बात कही जा रही है। माने इनका नेटवर्क विदेशों तक है। वन माफियाओं द्वारा किए जा रहे इस गोरखधंधे की जानकारी विभागीय अधिकारियों को नहीं थी।




















